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Haryana Doctors Suspension: 50 डॉक्टरों को सस्पेंड करने के हरियाणा सरकार के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक, सरकार से जवाब तलब

GGaganpreet Kaur
50 डॉक्टरों को सस्पेंड करने के हरियाणा सरकार के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक, सरकार से जवाब तलब
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हरियाणा में गिरते लिंगानुपात की गाज डॉक्टरों पर गिराने के खट्टर-सैनी सरकार के प्रशासनिक रवैये को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा थोक के भाव में किए गए 50 डॉक्टरों के निलंबन आदेश पर हाईकोर्ट ने फिलहाल अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार पिछले 18 मई के अपने आदेश के बूते डॉक्टरों के खिलाफ आगे की कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं आगे बढ़ा सकती। लीगल एक्सपर्ट्स इस फैसले को स्वास्थ्य विभाग के उस एकतरफा ढर्रे पर एक बड़ी कानूनी रोक के रूप में देख रहे हैं, जहां जमीनी सामाजिक कमियों का ठीकरा सीधे मेडिकल स्टाफ पर फोड़ दिया गया था।

‘केवल खराब आंकड़ों के आधार पर निलंबन मनमाना’ — अदालत में दलील

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इस पूरे मामले की जड़ें बीती 18 मई को स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव द्वारा जारी किए गए एक तुगलकी फरमान से जुड़ी हैं। विभाग ने अपने-अपने इलाकों में लिंगानुपात की प्रभावी निगरानी न रख पाने की लापरवाही का आरोप लगाते हुए दर्जनों मेडिकल अधिकारियों को घर बैठा दिया था। सरकार के इस कदम को डॉ. विजय परमार, डॉ. विजय कुमार और डॉ. सतपाल सिंह ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रही अधिवक्ता हिमानी आनंद ने कोर्ट में पुरजोर दलील दी कि किसी क्षेत्र विशेष के सामाजिक और जनसांख्यिकीय आंकड़ों (सेक्स रेशियो) के खराब होने को आधार बनाकर डॉक्टरों को सीधे सस्पेंड कर देना पूरी तरह से तर्कहीन और मनमाना कदम है।

डॉ. सतपाल की तुरंत बहाली का निर्देश, अक्टूबर में होगी अगली जंग

दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने न सिर्फ निलंबन की आगे की प्रक्रिया पर स्टे दिया, बल्कि याचिकाकर्ता डॉ. सतपाल सिंह को राहत देते हुए उन्हें उनकी मूल पोस्टिंग पर तुरंत काम शुरू करवाने के आदेश भी जारी किए। इस कानूनी तनातनी के बीच अब सबकी नजरें राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि वह मामले की अगली सुनवाई से कम से कम सात दिन पहले अपना विस्तृत और लिखित जवाब कोर्ट के सामने पेश करे। अब इस मामले की अगली कानूनी लड़ाई 27 अक्टूबर को लड़ी जाएगी, जहां यह तय होगा कि क्या प्रशासनिक नाकामी का दोष डॉक्टरों के सिर मढ़ा जा सकता है या नहीं।

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