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ह्यूमन राइट एंड एंटी करप्शन कौंसिल ने की बार कौंसिल चुनावों में एससी-एसटी आरक्षण की मांग

VVinita Kohli
ह्यूमन राइट एंड एंटी करप्शन कौंसिल ने की बार कौंसिल चुनावों में एससी-एसटी आरक्षण की मांग
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भिवानी: बार कौंसिल चुनावों में अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लिए आरक्षण लागू करने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। इस मुद्दे को लेकर ह्यूमन राइट एंड एंटी करप्शन कौंसिल ने राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा। कौंसिल ने पंजाब और हरियाणा बार कौंसिल के इतिहास में वंचित वर्गों के शून्य प्रतिनिधित्व पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ बताया है। कौंसिल के चेयरमैन एडवोकेट शिव कुमार बेडवाल एवं सचिव अधिवक्ता अजय संभ्रवाल ने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि बार कौंसिलों में हजारों की संख्या में एससी-एसटी वर्ग से अधिवक्ता सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं, लेकिन जब बात नेतृत्व और प्रतिनिधित्व की आती है तो स्थिति निराशाजनक है। उन्होंने कहा कि पंजाब-हरियाणा बार कौंसिल के इतिहास में आज तक एक भी एससी-एसटी वर्ग से सदस्य निर्वाचित नहीं हो पाया है। 

यह आंकड़ा चुनावी प्रणाली में व्याप्त गंभीर असंतुलन और असमानता को उजागर करता है। उन्होंने तर्क दिया कि जब प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए महिलाओं को आरक्षण दिया जा सकता है, तो सामाजिक रूप से वंचित एससी-एसटी वर्ग के अधिवक्ताओं के लिए आरक्षण क्यों नहीं। उन्होंने कहा कि एडवोकेट्स एक्ट-1961 में आरक्षण का स्पष्ट प्रावधान नहीं है, लेकिन राज्य विधानसभाएं और स्वयं बार कौंसिल अपने नियमों में संशोधन कर इस विसंगति को दूर कर सकती हैं। ज्ञापन के माध्यम से कौंसिल के चेयरमैन एडवोकेट शिव कुमार बेडवाल एवं सचिव अधिवक्ता अजय संभ्रवाल ने मांग क कि बार कौंसिल चुनावों में एससी-एसटी वर्ग के लिए जनसंख्या के अनुपात में सीटें आरक्षित की जाएं, महिला आरक्षण की तर्ज पर एससी-एसटी अधिवक्ताओं के लिए भी को-ऑप्शन प्रणाली लागू की जाए ताकि उनका प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके, एससी-एसटी उम्मीदवारों के लिए नामांकन शुल्क में छूट दी जाए और चुनाव प्रचार में विशेष रियायतें प्रदान की जाएं तथा बार कौंसिल के भीतर अनिवार्य रूप से एससी-एसटी वकील कल्याण समिति का गठन किया जाए।

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