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IDFC Bank Scam Haryana: आईडीएफसी बैंक घोटाला: हरियाणा बिजली निगम के वित्त निदेशक अमित दिवान बर्खास्त, 50 करोड़ का था फर्जीवाड़ा

AAmandeep Singh
आईडीएफसी बैंक घोटाला: हरियाणा बिजली निगम के वित्त निदेशक अमित दिवान बर्खास्त, 50 करोड़ का था फर्जीवाड़ा
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हरियाणा। हरियाणा के बिजली निगमों में करोड़ों रुपये के ‘आईडीएफसी बैंक घोटाले’ ने प्रशासनिक हलकों में भूचाल ला दिया है। उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) ने अपने मुख्य वित्तीय अधिकारी और हरियाणा पावर जनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPGCL) के वित्त निदेशक अमित दिवान को बर्खास्त करने का आदेश जारी किया है। दिवान पर आरोप है कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी खजाने को निजी हाथों में सौंपने का काम किया। इस घोटाले की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, विभाग के कई अन्य बड़े अधिकारियों की नींद उड़ गई है।

50 करोड़ का वह ‘फर्जी’ खाता जिसने खोली पोल

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मामले की जड़ें साल 2024 की शुरुआत से जुड़ी हैं। दस्तावेजों की पड़ताल से पता चला है कि 27 फरवरी 2024 को चंडीगढ़ के सेक्टर-32 स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में ‘HPGCL Dry Fly Ash Fund’ के नाम से एक खाता खोला गया था। गौर करने वाली बात यह है कि उस वक्त यह बैंक सरकार की सूचीबद्ध (एम्पैनल्ड) बैंकों की सूची में शामिल नहीं था। इसके बावजूद, अमित दिवान ने नियमों को दरकिनार करते हुए 50 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि इस खाते में जमा करा दी। जांच टीम को इस खाते से हुए कई लेन-देन पूरी तरह फर्जी मिले हैं, जिनका कोई सरकारी रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।

शेल कंपनियों के जरिए सरकारी धन की ‘लॉन्ड्रिंग’

विभागीय जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि इस घोटाले का जाल सिर्फ एक बैंक तक सीमित नहीं था। अमित दिवान पर एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में भी इसी तरह के फर्जी खाते खुलवाने का आरोप है। इन खातों के माध्यम से करोड़ों रुपये सरकारी सिस्टम से बाहर निकालकर निजी संस्थाओं और शेल कंपनियों (कागजी कंपनियों) के खातों में ट्रांसफर किए गए। जांच एजेंसी का मानना है कि यह सीधे तौर पर सरकारी धन की लॉन्ड्रिंग का मामला है, जिसमें बैंक के कुछ कर्मचारी भी पर्दे के पीछे से सक्रिय थे।

भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस, अब आगे किसकी बारी?

अमित दिवान इस मामले में गाज गिरने वाले चौथे बड़े अधिकारी हैं। इससे पहले भी विभाग ने संदिग्ध भूमिका पाए जाने पर तीन अन्य अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की है। बिजली निगमों में जिस तरह से ‘फ्लाई ऐश फंड’ जैसे महत्वपूर्ण खातों में सेंधमारी की गई, उसने विभाग के इंटरनल ऑडिट पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल, सरकार ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि भ्रष्टाचार के इस संगठित खेल में शामिल किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस घोटाले के पीछे असली मास्टरमाइंड कौन है और क्या कुछ और बड़े नाम इस जांच की जद में आएंगे।

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