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आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों को 583 करोड़ रुपये लौटाए

VVinita Kohli
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों को 583 करोड़ रुपये लौटाए
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नई दिल्ली: निजी क्षेत्र के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने मंगलवार को कहा कि उसने हरियाणा सरकार के संबंधित विभागों के खातों में मूलधन एवं ब्याज समेत पूरी राशि जमा करा दी है जो कुल मिलाकर 583 करोड़ रुपये है। बैंक ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा, “मामले की जांच जारी होने के बावजूद बैंक ने हरियाणा सरकार के संबंधित विभागों द्वारा दावा की गई मूलधन और ब्याज की समूची राशि का भुगतान कर दिया है, जो शुद्ध रूप से 583 करोड़ रुपये है।”

 बैंक ने कहा कि वह कानून-प्रवर्तन एजेंसियों और राज्य सरकार के विभागों के साथ मिलकर इस धोखाधड़ी में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेगा और अपनी देनदारियों की वसूली के लिए प्रयासरत रहेगा। बैंक ने चंडीगढ़ की एक शाखा में हरियाणा सरकार से जुड़े कुछ खातों में 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का रविवार को खुलासा किया था। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस मामले पर विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक मामले में करीब 556 करोड़ रुपये की राशि वापस हासिल कर ली है। 

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मुख्यमंत्री ने कहा, “लगभग 22 करोड़ रुपये के ब्याज समेत करीब 556 करोड़ रुपये 24 घंटे के भीतर ही वापस आ गए।” उन्होंने सदन में स्पष्ट किया कि हरियाणा सरकार के विभागों से संबंधित पूरी राशि दोबारा खातों में जमा करा दी गई है और यह वसूली 24 घंटे के भीतर हुई है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, बैंक ने सरकार को सूचित किया है कि मामला चंडीगढ़ की एक शाखा से जुड़ा है, जिसमें मध्य और निचले स्तर के चार-पांच बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आई है। उन्होंने कहा कि इस मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वे बैंक कर्मचारी हों, निजी व्यक्ति हों या सरकारी कर्मचारी हों।

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने पहले कहा था कि यह धोखाधड़ी हरियाणा सरकार से जुड़े सीमित खातों तक ही सीमित है और चंडीगढ़ शाखा के अन्य ग्राहकों पर इसका कोई प्रभाव नहीं है। मामला सामने आने के बाद हरियाणा सरकार ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के साथ एयू स्माल फाइनेंस बैंक को भी सरकारी कामकाज की सूची से हटाने का निर्णय लिया है।

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