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Overheating car bike: गर्मियों में क्यों फेल होने लगता है गाड़ियों का इंजन? जानिए ओवरहीटिंग से बचने के अचूक उपाय

AAmandeep Singh
गर्मियों में क्यों फेल होने लगता है गाड़ियों का इंजन? जानिए ओवरहीटिंग से बचने के अचूक उपाय
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टेक्नोलॉजी। भारत में गर्मियों का मौसम गाड़ियों के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होता। दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में जब लू के थपेड़े चलते हैं और डामर की सड़कें भट्टी की तरह तपने लगती हैं, तब गाड़ियों के परफॉर्मेंस ग्राफ में भारी गिरावट दर्ज की जाती है। भारत के महानगरों में मिलने वाला रेंगता हुआ ट्रैफिक इस समस्या को और भयावह बना देता है। जब गाड़ी भारी ट्रैफिक में बार-बार फर्स्ट और सेकंड गियर में रुक-रुक कर चलती है, तो इंजन को ठंडी हवा बिल्कुल नहीं मिल पाती। ऐसे में बाहरी अत्यधिक तापमान और इंजन की खुद की गर्मी मिलकर कूलिंग सिस्टम को पूरी तरह चोक कर देती है।

धूल-मिट्टी और लोकल ड्राइविंग कंडीशंस का इंजन पर असर

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भारतीय सड़कों पर उड़ने वाली धूल और पोल्यूशन गाड़ियों के रेडिएटर के सबसे बड़े दुश्मन हैं। कार के आगे हिस्से में लगा रेडिएटर ग्रिल समय के साथ मिट्टी और कीचड़ की वजह से बंद हो जाता है। जब रेडिएटर के जालीदार विंग्स ब्लॉक हो जाते हैं, तो सामने से आने वाली हवा इंजन के कूलेंट को ठंडा नहीं कर पाती। इसके अलावा, भारत में लोग अक्सर इंजन ऑयल और कूलेंट की जगह साधारण पानी का इस्तेमाल करने की भूल कर बैठते हैं। भीषण गर्मी में पानी बहुत जल्दी भाप बनकर उड़ जाता है या इंजन के भीतर जंग (रस्टिंग) पैदा कर देता है, जिससे वॉटर पंप जाम हो जाता है और इंजन कुछ ही किलोमीटर में खौलने लगता है।

भारत की बजट बाइक्स और ‘एयर कूलिंग’ की सीमाएं

भारत के टू-व्हीलर मार्केट में आज भी 80 फीसदी हिस्सेदारी 100cc से 125cc वाली कम्यूटर बाइकों की है। इन बजट बाइकों में लागत कम रखने के लिए केवल ‘एयर कूल्ड’ इंजन दिए जाते हैं, जो पूरी तरह इस बात पर निर्भर करते हैं कि गाड़ी कितनी रफ्तार में चल रही है और बाहर की हवा कितनी ठंडी है। भारतीय शहरों के भारी ट्रैफिक में जब बाइक की रफ्तार 10 से 20 किमी प्रति घंटा रह जाती है, तो एयर कूलिंग सिस्टम लगभग निष्क्रिय हो जाता है। ऊपर से दोपहर के वक्त जब बाहर की हवा ही 45 डिग्री गर्म हो, तो वह इंजन की तपिश को कम करने के बजाय उसे और बढ़ा देती है। यही वजह है कि गर्मियों में बाइक अचानक चलते-चलते झटके लेने लगती है या उसका पिकअप एकदम गिर जाता है।

टायर प्रेशर, ओवरलोडिंग और एसी का ओवरयूज़

भारतीय परिवारों में अक्सर क्षमता से अधिक लोगों या सामान को गाड़ी में लादने का चलन है। गर्मियों में जब कार का एसी फुल पर चल रहा हो, गाड़ी ओवरलोडेड हो और टायर में हवा का प्रेशर कम हो, तो इंजन पर पड़ने वाला लोड सामान्य से तीन गुना ज्यादा हो जाता है। कम हवा के कारण टायर और सड़क के बीच घर्षण (फ्रिक्शन) बढ़ता है, जिससे इंजन को पहियों को घुमाने के लिए ज्यादा टॉर्क पैदा करना पड़ता है। इससे न सिर्फ गाड़ी का माइलेज अचानक 30 से 40 फीसदी तक गिर जाता है, बल्कि इंजन का तापमान खतरे के निशान को पार कर जाता है।

भारतीय वाहन चालकों के लिए काम की टिप्स: कैसे बचाएं गाड़ी?

यदि आप इस भीषण गर्मी में किसी लंबे रूट जैसे दिल्ली-जयपुर हाइवे या मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर निकल रहे हैं, तो कुछ नियमों का कड़ाई से पालन करें। भारत की परिस्थितियों में सबसे बेहतर तरीका यह है कि दोपहर 12 से 3 बजे के बीच लंबे सफर से बचें। अगर सफर जरूरी है, तो हर 80-100 किलोमीटर के बाद किसी ढाबे या पेट्रोल पंप की छाया में गाड़ी खड़ी कर 15 मिनट का ‘कूल-डाउन ब्रेक’ लें।

अपनी कार की सर्विसिंग के दौरान रेडिएटर की ‘प्रेशर वॉश’ सफाई जरूर करवाएं ताकि धूल निकल जाए। बाइक चलाते समय अगर पैर के पास बहुत तेज आंच महसूस हो, तो जबरन थ्रॉटल खींचने की बजाय बाइक को साइड स्टैंड पर लगाकर थोड़ी देर आराम दें। याद रखें, इंजन ऑयल हमेशा अच्छी ग्रेड का और सिंथेटिक इस्तेमाल करें, जो भारतीय गर्मियों के हाई-तापमान को सहने की क्षमता रखता हो।

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