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Inspiration Story: कौन हैं 83 लाख का पैकेज छोड़ने वाले मंतज सिद्धू, जिनकी खेती की सितंबर 2026 तक बुकिंग फुल

AAmandeep Singh
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Inspiration Story: कौन हैं 83 लाख का पैकेज छोड़ने वाले मंतज सिद्धू, जिनकी खेती की सितंबर 2026 तक बुकिंग फुल

कौन हैं 83 लाख का पैकेज छोड़ने वाले मंतज सिद्धू, जिनकी खेती की सितंबर 2026 तक बुकिंग फुल

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Inspiration Story: कॉरपोरेट की चकाचौंध, डबलिन का शानदार लाइफस्टाइल और 83 लाख रुपये का सालाना पैकेज—किसी भी नौजवान के लिए यह एक सपनों जैसी जिंदगी हो सकती है। लेकिन पटियाला के रहने वाले मंतज सिंह सिद्धू के लिए यह सब कुछ एक मोड़ पर आकर ठहर सा गया। कॉरपोरेट सीढ़ी चढ़ते हुए जब उन्हें लगा कि वे अपनी जड़ों से दूर होते जा रहे हैं, तो उन्होंने एक ऐसा फैसला लिया जिसने न सिर्फ उनके अपनों को चौंकाया, बल्कि आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है।

मंतज ने गूगल की आरामदेह नौकरी को अलविदा कहा और वापस अपने वतन पंजाब लौट आए। यहां उन्होंने अपनी जमीन से जुड़कर ऑर्गेनिक (प्राकृतिक) खेती का ऐसा बिजनेस मॉडल खड़ा किया, जिसकी धूम अब विदेशों तक में देखने को मिल रही है।

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हैदराबाद से डबलिन तक का सफर और मन में उठा एक सवाल

पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ से एमबीए करने वाले मंतज का करियर ग्राफ शुरुआत से ही बेहतरीन रहा। टेक और मार्केटिंग के प्रति अपने रुझान के चलते उन्हें गूगल में काम करने का मौका मिला। हैदराबाद से शुरू हुआ उनका यह सफर जल्द ही आयरलैंड की राजधानी डबलिन तक जा पहुंचा, जहां वे करीब 5 सालों तक गूगल के शीर्ष रणनीतिकारों में शामिल रहे। वे यूके की दिग्गज विज्ञापन एजेंसियों के लिए बिजनेस प्लान तैयार करते थे।

तमाम सुख-सुविधाओं और बड़े ओहदे के बावजूद 2022 आते-आते मंतज का मन इस कॉरपोरेट ढर्रे से उटने लगा। उन्हें लगा कि भारी-भरकम पैकेज के बाद भी जिंदगी एक ही ढर्रे पर घूम रही है। इसी आत्ममंथन ने उन्हें अपनी पुरानी जड़ों की ओर वापस लौटने का हौसला दिया और उन्होंने इस्तीफा सौंप दिया।

दादा की विरासत और भाइयों की जोड़ी से बना ‘Gill Organics’

पंजाब लौटकर मंतज ने अपने चचेरे भाई डॉ. बलजीत सिंह गिल के साथ हाथ मिलाया और ‘Gill Organics’ की नींव रखी। दोनों भाइयों को इस वेंचर की प्रेरणा अपने दादा सरदार बलदेव सिंह सिद्धू से मिली, जो पूरी जिंदगी शुद्ध खान-पान और प्राकृतिक जीवनशैली के पैरोकार रहे और 94 साल की उम्र तक एकदम सेहतमंद रहे।

पटियाला के फतेहपुर गांव स्थित ‘गिल फार्महाउस’ को इस पूरे कारोबार का केंद्र बनाया गया। डॉ. बलजीत, जिन्होंने पंजाबी यूनिवर्सिटी से पीएचडी की है, ने खेती की वैज्ञानिक और प्राकृतिक बारीकियों को संभाला, जबकि मंतज ने अपने मार्केटिंग हुनर से इस पारंपरिक काम को एक आधुनिक और भरोसेमंद ब्रांड में बदल दिया।

फार्म लीज पर दो और सब्जियां पाओ: सितंबर 2026 तक फुल हुई बुकिंग

‘गिल ऑर्गेनिक्स’ का बिजनेस मॉडल काफी अनूठा है। इन्होंने शहरी परिवारों को सीधे अपनी जमीन से जोड़ने का तरीका निकाला। इसके तहत ग्राहकों को खेत का एक निश्चित टुकड़ा एक तय अवधि के लिए किराए पर दे दिया जाता है। इस हिस्से में ग्राहकों की पसंद की मौसमी सब्जियां पूरी तरह बिना किसी केमिकल के उगाई जाती हैं। ग्राहक चाहें तो सप्ताहांत पर खुद आकर सब्जियां तोड़ सकते हैं या फिर सीधे उनके घर पर ताजी सब्जियों की डिलीवरी कर दी जाती है।

बाजार में ‘ऑर्गेनिक’ के नाम पर हो रही धोखाधड़ी के बीच इस पारदर्शी मॉडल ने लोगों का दिल जीत लिया। शुरुआत में महज 35 परिवारों के साथ शुरू हुआ यह सफर आज इस मुकाम पर पहुंच गया है कि नए ग्राहकों के लिए जगह ही नहीं बची है। मांग का आलम यह है कि वेबसाइट पर नई बुकिंग पूरी तरह बंद हैं और अगली बुकिंग विंडो अब सितंबर 2026 में ही खुलेगी। मंतज का यह कदम साबित करता है कि अगर सोच दूरदर्शी हो, तो पंजाब की मिट्टी में भी सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है।

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