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ब्याज दरें मध्यम से लंबी अवधि में कम बने रहने का अनुमान: आरबीआई गवर्नर

VVinita Kohli
ब्याज दरें मध्यम से लंबी अवधि में कम बने रहने का अनुमान: आरबीआई गवर्नर
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मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को भरोसा जताया कि मुद्रास्फीति की अनुकूल स्थिति को देखते हुए ब्याज दरें मध्यम से लंबी अवधि में नीचे बनी रहेंगी। मल्होत्रा ने द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद संवाददाताओं से कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था अत्यंत मजबूत है और इसमें बाहरी झटकों या प्रतिकूल परिस्थितियों से उबरने की जबरदस्त क्षमता है। उन्होंने कहा कि देश की बुनियादी आर्थिक स्थिति बेहतर है, जिसके कारण वृद्धि को गति मिल रही है और कीमतों पर दबाव भी कम है।

गवर्नर ने कहा, “इस बात की पूरी संभावना है कि अल्पावधि से मध्यम अवधि में भी ब्याज दरें कम बनी रहेंगी।” आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। वहीं, चालू वित्त वर्ष के लिए मुद्रास्फीति 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो रिजर्व बैंक के मुद्रास्फीति के लिए निर्धारित दो से छह प्रतिशत लक्ष्य के भीतर है। इससे पहले, रिजर्व बैंक की छह-सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने सर्वसम्मति से ‘रेपो दर’ को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया। यह फैसला ईरान संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर पड़ने वाले प्रभावों को देखते हुए लिया गया है।

आरबीआई गवर्नर ने स्पष्ट किया कि मौद्रिक नीति की समीक्षा करते समय अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो सप्ताह के युद्धविराम को भी ध्यान में रखा गया है। ब्याज दरों में कटौती का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाने के मुद्दे पर मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई की तरफ से रेपो दर में की गई कुल 1.25 प्रतिशत अंकों की कटौती के मुकाबले बैंकों ने ऋण पर लगभग 0.90 प्रतिशत अंकों की कटौती की है, जो संतोषजनक है। रुपये की स्थिति पर उन्होंने कहा कि मुद्रा बाजार में हाल ही में उठाए गए कदम रुपये की विनिमय दर में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए थे और ये स्थायी उपाय नहीं हैं।

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