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Internet Without Sim WiFi: बिना सिम और वाई-फाई के इंटरनेट का दावा कितना सच?, कैसे काम करते हैं ऐप्स

AAmandeep Singh
Internet Without Sim WiFi: बिना सिम और वाई-फाई के इंटरनेट का दावा कितना सच?, कैसे काम करते हैं  ऐप्स
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टेक्नोलॉजी। डिजिटल युग में स्मार्टफोन बिना इंटरनेट के एक डिब्बे जैसा महसूस होने लगता है। ऐसे में अगर कोई कहे कि बिना सिम कार्ड और बिना किसी वाई-फाई कनेक्शन के भी आपके फोन में इंटरनेट दौड़ सकता है, तो चौंकना लाजिमी है। इंस्टाग्राम के एक हैंडल ncupodcast पर दिए इंटरव्यू में साइबर एक्सपर्ट अमित दुबे ने कुछ ऐसा ही दावा किया है। उन्होंने समझाया कि हमारे स्मार्टफोन में इन-बिल्ट ट्रांसमीटर और रिसीवर होते हैं, जो सीधे तौर पर एक हॉटस्पॉट की तरह काम कर सकते हैं। उनका कहना है कि अगर एक खास एप्लीकेशन को हजारों फोन्स में डाल दिया जाए, तो ये फोन बिना किसी टेलीकॉम ऑपरेटर (जैसे जियो, एयरटेल) के आपस में जुड़ सकते हैं।

कैसे काम करती है यह तकनीक? ‘ब्रिजफाई’ और ‘फायरचैट’ का गणित

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तकनीकी भाषा में इस व्यवस्था को ‘पीयर-टू-पीयर मेश नेटवर्क’ (P2P Mesh Network) कहा जाता है। इसे समझने के लिए एक साधारण उदाहरण लिया जा सकता है— यदि एक निश्चित दूरी पर कई सारे फोन कतार में रख दिए जाएं, तो वे एक-दूसरे के लिए पुल (Bridge) का काम करने लगते हैं। पहला फोन दूसरे को डेटा भेजेगा, दूसरा तीसरे को, और इस तरह एक लंबी चेन बन जाएगी।

इंटरनेट बंद होने या प्राकृतिक आपदा के समय जब मोबाइल टावर ठप हो जाते हैं, तब Bridgefy या FireChat जैसे ऐप्स इसी तकनीक के जरिए लोगों को आपस में संदेश भेजने की सुविधा देते हैं। हालांकि, एक्सपर्ट ने अपने वीडियो में किसी खास ऐप का नाम उजागर नहीं किया, लेकिन उन्होंने यह जरूर माना कि इस प्रक्रिया में डेटा ट्रांसफर रीयल-टाइम में न होकर कुछ देरी (लैक) के साथ होता है।

क्यों यह तरीका आम इंटरनेट का विकल्प नहीं बन सकता?

भले ही यह सुनने में किसी जादुई तकनीक जैसा लगे, लेकिन इसे ‘ग्लोबल इंटरनेट’ कहना तकनीकी रूप से पूरी तरह गलत होगा। जानकारों का कहना है कि अमित दुबे की बात में जो सबसे बड़ा पेंच है, वो यह कि इस सेटअप से आप केवल उसी नेटवर्क के दायरे में मौजूद लोगों से ऑफलाइन चैट या फाइल शेयरिंग कर सकते हैं। अगर आप चाहें कि इस तरीके से गूगल पर कुछ सर्च कर लें, यूट्यूब पर वीडियो देख लें या इंस्टाग्राम पर रील्स स्क्रॉल कर लें, तो यह पूरी तरह असंभव है। वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) या वैश्विक इंटरनेट का लुत्फ उठाने के लिए फोन में एक्टिव इंटरनेट कनेक्शन (सिम या वाई-फाई) होना ही चाहिए।

बैटरी और सुरक्षा का बड़ा सिरदर्द

इस तकनीक को रोजाना इस्तेमाल में न लाने के पीछे कई व्यावहारिक कारण हैं। जब आपका फोन लगातार एक ट्रांसमीटर और रिसीवर की तरह काम करेगा और हर समय सिग्नल खोजेगा या आगे बढ़ाएगा, तो फोन की बैटरी चंद घंटों में ही दम तोड़ देगी। इसके अलावा, चूंकि डेटा एक फोन से होते हुए दूसरे फोन तक पहुंचेगा, इसलिए बीच में डेटा हैक होने या प्राइवेसी लीक होने का खतरा सौ गुना बढ़ जाता है। साफ है कि यह तकनीक किसी आपातकालीन स्थिति में मैसेज भेजने के लिए तो वरदान हो सकती है, लेकिन इसे रेगुलर इंटरनेट का विकल्प मानना जल्दबाजी होगी

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