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पश्चिम एशिया युद्ध के बाद से निवेशकों को 51 लाख करोड़ रुपये का नुकसान, सेंसेक्स 11 प्रतिशत टूटा

JJagmarg Desk
पश्चिम एशिया युद्ध के बाद से निवेशकों को 51 लाख करोड़ रुपये का नुकसान, सेंसेक्स 11 प्रतिशत टूटा
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नयी दिल्ली: पश्चिम एशिया में फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद से शेयर बाजार में निवेशकों को भारी नुकसान हुआ है। इस दौरान मानक सूचकांक बीएसई सेंसेक्स 11 प्रतिशत से अधिक लुढ़क गया। कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक बाजारों पर युद्ध के व्यापक प्रभाव के कारण निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं।

विदेशी संस्थागत निवेशकों की बाजार से पूंजी निकासी से भी झटका लगा है। पश्चिम एशिया में 28 फरवरी से संघर्ष शुरू होने के बाद से बीएसई सेंसेक्स 9,339.64 अंक यानी 11.48 प्रतिशत लुढ़क गया है।

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शेयर बाजार में आई इस भारी गिरावट के चलते, बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण इस दौरान 51,09,498.82 करोड़ रुपये घटकर 4,12,41,172.45 करोड़ रुपये (4,360 अरब डॉलर) पर रहा।

एनरिच मनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पोनमुडी आर ने कहा कि मौजूदा नरमी का कारण दुनिया में बढ़ी अनिश्चितता है, न कि बुनियादी कारण। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, पश्चिम एशिया में संघर्ष और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने जोखिम से बचने का माहौल बना दिया है।

बीएसई सेंसेक्स अबतक के सबसे उच्चतम स्तर 86,159.02 अंक से 14,211.47 अंक यानी 16.49 प्रतिशत नीचे आ गया है। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 4.15 प्रतिशत बढ़कर 117.46 डॉलर प्रति बैरल हो गया।

पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव और कमजोर होते रुपये के कारण विदेशी निवेशकों ने मार्च में घरेलू शेयर बाजार से एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की है, जो किसी एक महीने में अब तक की सबसे बड़ी निकासी है।

बजाज ब्रोकिंग के एसोसिएट उपाध्यक्ष (तकनीकी शोध) पी मुखर्जी ने कहा कि संघर्ष शुरू होने के बाद के चार सप्ताह में जोखिम से बचने की तेज प्रवृत्ति देखी गयी है। यह 2020 में कोविड-19 महामारी के कारण वैश्विक बाजार में आई उथल-पुथल के बाद से सबसे तेज है। इस दौरान, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की पूंजी निकासी ने बाजार में गिरावट के पीछे प्रमुख भूमिका निभाई है। इससे लगातार बिकवाली का दबाव बना रहा।

उन्होंने कहा कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने मार्च, 2026 के दौरान भारतीय शेयरों में काफी बिकवाली की, जो हाल के समय में सबसे बड़ी मासिक पूंजी निकासी में से एक है। मुखर्जी ने कहा कि इस बड़े पैमाने पर निकासी का प्राथमिक कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है। इस तनाव ने वैश्विक अनिश्चितता और जोखिम से बचने की प्रवृत्ति को बढ़ा दिया है।

शेयर बाजार सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी सोमवार को वित्त वर्ष 2025-26 के अंतिम कारोबारी सत्र में दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ बंद हुए।

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