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Israna New Tehsil Building: पानीपत: नई तहसील के मुख्य द्वार पर दिखी दरारें, पीडब्ल्यूडी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल

GGaganpreet Kaur
पानीपत: नई तहसील के मुख्य द्वार पर दिखी दरारें, पीडब्ल्यूडी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल
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पानीपत। भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण सामग्री का दीमक सरकारी इमारतों को किस कदर खोखला कर रहा है, इसका ताजा नमूना इसराना उपमंडल में निर्माणाधीन नई तहसील की इमारत में देखने को मिला है। अभी इस भव्य दो मंजिला इमारत का पूरी तरह उद्घाटन भी नहीं हुआ है कि इसके मुख्य प्रवेश द्वार (गेट) पर गहरी दरारें उभर आई हैं। सवा दो एकड़ में फैली इस आलीशान बिल्डिंग की मजबूती को लेकर अब स्थानीय लोगों और राहगीरों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। लोगों का सीधा आरोप है कि ठेकेदार और संबंधित विभाग ने निर्माण की गुणवत्ता में भारी कोताही बरती है।

मंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट पर लापरवाही का दाग!

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इसराना में तहसील परिसर की मांग दशकों पुरानी थी। कैबिनेट मंत्री कृष्ण लाल पंवार के विशेष प्रयासों के बाद इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिली थी। पीडब्ल्यूडी (PWD) विभाग ने 15 जून 2022 को इस भवन का काम शुरू किया था, जिस पर 9 करोड़ 74 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। जनता को उम्मीद थी कि अब उन्हें एक ही छत के नीचे तमाम प्रशासनिक सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन मुख्य गेट की दरारों ने इस खुशी पर आशंकाओं के बादल मंडरा दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर गेट की यह हालत है, तो पूरी बिल्डिंग की नींव और दीवारों की मजबूती पर भरोसा कैसे किया जाए?

एक छत के नीचे होगा पूरा प्रशासन, पर सुरक्षा का क्या?

वर्तमान में इसराना तहसील का कामकाज बीडीपीओ कार्यालय की एक पुरानी बिल्डिंग से चलाया जा रहा है, जहां 27 गांवों के पटवारी और अन्य कर्मचारी बैठने को मजबूर हैं। नई बिल्डिंग बनने से तहसीलदार, नायब तहसीलदार और ग्रुप-सी व डी श्रेणी के कर्मचारियों के लिए आवासीय सुविधा भी इसी परिसर में दी जा रही है। पीछे की तरफ कर्मचारियों के आवास का काम लगभग अंतिम चरण में है। अधिकारियों का तर्क है कि आवासीय सुविधा से सरकारी कामकाज में तेजी आएगी, लेकिन भवन की ‘खस्ता’ होती हालत ने अधिकारियों की चिंता भी बढ़ा दी है।

पार्किंग के लिए एनओसी का इंतजार, फिर होगा हैंडओवर

तहसील परिसर का ढांचा लगभग तैयार है, लेकिन अब पेंच पार्किंग स्थल को लेकर फंसा हुआ है। पार्किंग के लिए प्रस्तावित जगह पर पेड़ खड़े होने के कारण वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) मांगा गया है। विभाग का कहना है कि जैसे ही एनओसी मिलेगी, पार्किंग का काम पूरा कर भवन को राजस्व विभाग को सौंप दिया जाएगा। हालांकि, अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विभाग इन दरारों पर ‘लीपापोती’ करेगा या फिर इसकी तकनीकी जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई होगी? स्थानीय निवासियों ने मुख्यमंत्री से इस निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

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