Jalandhar Mattress Factory Fire : जालंधर के घने रिहायशी इलाके बस्ती पीरदाद रोड पर उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब ‘मोदी मैट्रेस’ नाम की गद्दा बनाने वाली फैक्ट्री में अचानक भीषण आग लग गई। घटना सुबह करीब 9 बजे की है, जब फैक्ट्री के भीतर लगभग 30 कर्मचारी काम कर रहे थे।
देखते ही देखते धुएं का गुबार और आग की ऊंची लपटें आसपास के मकानों तक पहुंचने लगीं, जिसके बाद कर्मचारियों और पड़ोसियों ने भागकर अपनी जान बचाई। गद्दे बनाने में इस्तेमाल होने वाले फोम, ज्वलनशील केमिकल्स और कपड़े की वजह से आग ने बेहद कम समय में विकराल रूप धारण कर लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग की तपन इतनी ज्यादा थी कि फैक्ट्री की छत (लैंटर का शेड) भरभराकर नीचे जा गिरी। गनीमत यह रही कि कोई कर्मचारी इसकी चपेट में नहीं आया, हालांकि भागने के दौरान पैर फिसलने से एक व्यक्ति घायल हो गया, जिसे तुरंत इलाज के लिए पास के अस्पताल में दाखिल कराया गया है।
दमकल की 10 गाड़ियां मौके पर जुटीं, 95 फीसदी आग पर पाया गया काबू
हादसे की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम दमकल की 8 से 10 गाड़ियों के साथ मौके पर पहुंची। एडीएफओ (ADFO) मनिंदर सिंह ने बताया कि उन्हें सुबह 9:15 बजे सूचना मिली थी, जिसके तुरंत बाद दमकल गाड़ियों को रवाना किया गया।
छत और शेड गिरने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी दिक्कतें आईं, लेकिन फायर फाइटर्स ने तेजी दिखाते हुए करीब 95 प्रतिशत आग पर काबू पा लिया है। शुरुआती जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है, हालांकि सही कारणों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो पाएगी।
स्थानीय ने फैक्ट्रियों को रिहायशी इलाके से बाहर निकालने की अपील की
इस हादसे ने रिहायशी इलाकों में चल रही अवैध फैक्ट्रियों की पोल खोलकर रख दी है। स्थानीय निवासी केशव ने पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि पुलिस की टीम सूचना के करीब एक घंटे बाद मौके पर पहुंची। इसके अलावा फैक्ट्री प्रबंधन से भी कोई अधिकारी स्थिति का जायजा लेने नहीं आया।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, करीब 10 साल पहले भी इसी इलाके की एक यूनिट में आग लगी थी। उस समय मालिकों ने आश्वासन दिया था कि मैन्युफैक्चरिंग बंद करके इस जगह का इस्तेमाल सिर्फ गोदाम के रूप में किया जाएगा, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर यहां धड़ल्ले से गद्दे बनाए जा रहे थे।
इतना ही नहीं, फैक्ट्री के भीतर भारी मात्रा में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर भी रखे हुए थे, जिससे एक बहुत बड़ा धमाका हो सकता था। गुस्साए मोहल्लावासियों ने प्रशासन से रिहायशी इलाकों से ऐसी खतरनाक औद्योगिक इकाइयों को तुरंत बाहर शिफ्ट करने की मांग की है।
Ludhiana China Dor Accident : लुधियाना में चाइना डोर का खूनी कहर, युवती की गर्दन पर लगा 10 इंच का कट

