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BSF Sub Inspector Balraj Singh Kaul: बीएसएफ में 40 साल की नौकरी के बाद गांव कौल लौटे सब इंस्पेक्टर बलराज सिंह, स्वागत में उमड़ा पूरा इलाका

GGaganpreet Kaur
बीएसएफ में 40 साल की नौकरी के बाद गांव कौल लौटे सब इंस्पेक्टर बलराज सिंह, स्वागत में उमड़ा पूरा इलाका
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ढांड ( नरेश ढांडा ) कुरुक्षेत्र और कैथल की सीमा पर बसे ऐतिहासिक गांव कौल की गलियां आज देशभक्ति के तरानों और भारत माता के जयकारों से गूंज उठीं। मौका था सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जांबाज सब इंस्पेक्टर बलराज सिंह की वतन वापसी का। बलराज सिंह ने अपने जीवन के अमूल्य 40 वर्ष देश की कठिन और संवेदनशील सीमाओं की चौकसी में बिताए हैं। जैसे ही उनकी गाड़ी ने गांव की सीमा में प्रवेश किया, पहले से ही पलक-पावड़े बिछाए बैठे ग्रामीणों का बांध टूट गया। युवाओं ने उन्हें कंधों पर उठा लिया और फूलों की बारिश से पूरा इलाका महक उठा।

मोटरसाइकिलों के काफिले के साथ निकला विजय जुलूस

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बलराज सिंह के सम्मान में ग्राम पंचायत और स्थानीय युवाओं ने एक विशाल विजय जुलूस निकाला। दर्जनों गाड़ियों और सैकड़ों मोटरसाइकिलों के इस काफिले के साथ सब इंस्पेक्टर बलराज सिंह को गांव के मुख्य चौकों और अंदरूनी गलियों से होते हुए उनके निवास स्थान तक ले जाया गया। गांव की बुजुर्ग महिलाओं ने आरती उतारकर और तिलक लगाकर अपने लाडले का स्वागत किया। पूरा दृश्य ऐसा था मानो कोई बड़ा त्योहार मनाया जा रहा हो।

अपनी माटी के दिग्गजों को दी श्रद्धांजलि

अपनी जन्मभूमि लौटने के बाद बलराज सिंह ने सबसे पहले गांव की उन महान शख्सियतों को याद किया जिन्होंने कौल का नाम देश-दुनिया में चमकाया है। उन्होंने बाबू अनंतराम की प्रतिमा, जनता कॉलेज परिसर में स्थापित अर्जुन अवार्डी स्वर्गीय बलवंत सिंह बल्लू, हरियाणा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय चौधरी ईश्वर सिंह और रोड राजा चौक पर जाकर महान पुरुषों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया। बलराज सिंह ने कहा कि इन महापुरुषों की प्रेरणा से ही वे 40 साल तक बिना थके और बिना रुके देश की सेवा कर पाए।

वर्दी उतरी है, देश सेवा का जज्बा नहीं: बलराज सिंह

एक भावुक संबोधन में सेवानिवृत्त सब इंस्पेक्टर बलराज सिंह ने कहा कि सेना या अर्धसैनिक बल की नौकरी सिर्फ एक आजीविका नहीं, बल्कि एक साधना है। उन्होंने कहा, “भले ही आज मेरे शरीर से बीएसएफ की वर्दी उतर गई है, लेकिन राष्ट्र के प्रति मेरा समर्पण और एक सैनिक का जज्बा आखिरी सांस तक कायम रहेगा।” उन्होंने गांव के युवाओं से अपील की कि वे नशे और शॉर्टकट के रास्तों से दूर रहकर अनुशासन, कड़ी मेहनत और राष्ट्रभक्ति को अपने जीवन का मूलमंत्र बनाएं।

इस ऐतिहासिक स्वागत समारोह में जिला परिषद के चेयरमैन कर्मबीर कौल, सरपंच प्रतिनिधि नरेश आढ़ती, मिंटू सागवाल, मास्टर धर्मवीर, बलकार कोच, मास्टर रणबीर आर्य, संजीव कोच, महेंद्र सिंह फूलाराम और पंडित अभिषेक सहित बड़ी संख्या में इलाका निवासी मौजूद रहे।

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