Kaithal Mandi news: हरियाणा के कैथल में मौसम की बेरुखी ने अन्नदाताओं की मुश्किलें फिर बढ़ा दी हैं। गुरुवार की अल सुबह अचानक तेज बारिश का दौर शुरू हुआ, जो रुक-रुक कर लगातार जारी रहा। इस झमाझम बारिश ने जहाँ एक ओर खेतों में खड़ी फसल को प्रभावित किया है, वहीं जिला मुख्यालय से लेकर उपमंडलों की अनाज मंडियों में पसरे बदइंतजामी के चित्रों को बेनकाब कर दिया है। मंडियों में जल निकासी के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण बारिश का पानी सीधे धान की ढेरियों और बोरियों के नीचे भर गया, जिससे हजारों क्विंटल फसल पानी में डूबी नजर आई।
धान के इस सीजन में सबसे बड़ी समस्या खरीद के मुकाबले उठान का बहुत धीमा होना है। आधिकारिक आंकड़ों पर गौर करें तो कैथल जिले की विभिन्न मंडियों और खरीद केंद्रों पर अब तक कुल 3,09,220 मीट्रिक टन धान की रिकॉर्ड खरीद हो चुकी है। इसके विपरीत, एजेंसियों द्वारा केवल 1,31,736 मीट्रिक टन धान का ही मंडियों से उठान किया जा सका है। इसका सीधा मतलब यह है कि लगभग दो लाख मीट्रिक टन धान आज भी मंडियों में खुले आसमान के नीचे अपनी बारी का इंतजार कर रहा है। समय पर उठान न होने के कारण ही आज यह फसल आसमान से बरसी आफत की सीधी चपेट में आ गई है।
मंडियों-खरीद केंद्रों पर बारिश का असर और आंकड़े
जिलेभर में फैले खरीद केंद्रों की स्थिति पर नजर डालें तो ढांड, पूंडरी, चीका, गुहला, कलायत और कैथल की मुख्य व अतिरिक्त मंडियों में बंपर आवक हुई है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने जहाँ 1,51,654 मीट्रिक टन धान खरीदा है, वहीं हैफेड ने 1,04,272 मीट्रिक टन और हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन ने 53,294 मीट्रिक टन धान की खरीद दर्ज की है। इसके अलावा ढांड मंडी में 47,909 मीट्रिक टन, पूंडरी में 40,482 मीट्रिक टन और कैथल की अतिरिक्त मंडी में 43,058 मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका है। भारी-भरकम खरीद के बावजूद मिलर्स और ट्रांसपोर्टर्स की सुस्ती के चलते मंडियों में धान के पहाड़ खड़े हैं, जिन पर अब बारिश का पानी पड़ने से नमी बढ़ने और दाना खराब होने का खतरा मंडराने लगा है।
प्रशासन का पक्ष और किसानों का दर्द
भीगी हुई फसल को लेकर किसानों में रोष व्याप्त है। किसानों का कहना है कि अगर एजेंसियों ने समय रहते धान का उठान कर लिया होता तो आज उनकी मेहनत यों पानी में न भीगती। नमी अधिक होने से अब धान की गुणवत्ता प्रभावित होगी, जिसका खामियाजा अंततः किसानों को ही भुगतना पड़ेगा। हालांकि, इस पूरे मामले पर जिला प्रशासन अपनी तैयारियों को लेकर मुस्तैद नजर आ रहा है। डीसी अपराजिता ने स्पष्ट किया है कि जिला प्रशासन किसानों की सुविधा और एमएसपी पर धान की सुचारू खरीद के लिए पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने संबंधित खरीद एजेंसियों और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि खरीदे गए धान का उठान युद्धस्तर पर सुनिश्चित किया जाए ताकि मौसम के इस मिजाज के बीच किसानों को और अधिक नुकसान न उठाना पड़े।
यह भी पढ़ें– हरियाणा में बिगड़ा मौसम, 10 जिलों में बारिश से मंडियों में भीगा धान

