Kaithal News: कैथल जिले के बाबा लदाना गांव स्थित प्रसिद्ध बाबा राजपुरी डेरे में हर साल की तरह इस बार भी दशहरे के पावन अवसर पर लगने वाले तीन दिवसीय वार्षिक मेले को लेकर उत्साह का माहौल है। गांव के युवाओं और स्थानीय लोगों ने मिलकर डेरे की कायापलट करने की ठान ली है। एक तरफ जहां प्राचीन मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी लाइटों और फूलों से सजाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ डेरे के पवित्र तालाब से पुराना पानी निकालकर नया जल भरा जा रहा है, ताकि परंपरा के अनुसार दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा सकें।
युवाओं और ग्रामीणों ने संभाला मोर्चा
स्थानीय निवासी जस्सी, रामबीर, दीपक, धर्मपाल और भगत राम ने बताया कि मेले को भव्य और सफल बनाने के लिए गांव के युवा पूरी शिद्दत से जुटे हैं। डेरे की दीवारों पर सफेदी कराने के साथ-साथ रोशनी के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। यह तीन दिवसीय मेला दशहरे से शुरू होकर एकादशी और द्वादशी तक चलेगा। इस दौरान हरियाणा के अलावा पंजाब, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान जैसे पड़ोसी राज्यों से भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु माथा टेकने और मन्नत मांगने पहुंचेंगे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ग्रामीण और आसपास के इलाकों के लोग मिलकर विशाल भंडारों का आयोजन भी करेंगे।
नए महंत बाबा महेश पुरी के नेतृत्व में होगा पहला आयोजन
गौरतलब है कि कुछ समय पहले इसी डेरे में एक साधु की संदिग्ध हत्या का मामला सामने आया था, जिसमें पुलिस ने तत्कालीन महंत दूजपुरी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इस घटना के बाद ग्रामीणों की सहमति से बाबा महेश पुरी को डेरे की नई महंत गद्दी सौंपी गई थी। इस बार का वार्षिक मेला नए महंत बाबा महेश पुरी की देखरेख और मार्गदर्शन में आयोजित किया जाएगा, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में भी खासा उत्साह देखा जा रहा है।
550 साल पुराना इतिहास और पशुओं की मन्नत के लिए है विख्यात
डेरे के वर्तमान महंत महेश पुरी ने जानकारी देते हुए बताया कि इस आध्यात्मिक स्थल का इतिहास करीब 550 वर्ष पुराना है। यह डेरा मुख्य रूप से पशुओं की सुख-शांति, बीमारी दूर होने और मन्नत पूरी होने के लिए पूरे क्षेत्र में विख्यात है। यहां श्रद्धालु विशेष रूप से दूध, आटा और घी चढ़ाने की प्राचीन परंपरा का निर्वहन करते हैं। इसके अलावा, इस पाउंड का संबंध महान संत स्वामी रामकृष्ण परमहंस और महाराज तोतापुरी से भी रहा है, जिनकी समाधि भी यहीं स्थित है। मेले के अंतिम दिन होने वाला राज्य-स्तरीय दंगल (कुश्ती प्रतियोगिता) इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रहता है, जिसके लिए प्रशासनिक स्तर पर भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की गई है।
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