September 26, 2026

Kaithal News: धान कटाई से पहले कैथल में 629 नोडल अधिकारी तैनात, पराली जलाई तो होगी FIR

0
Kaithal News: धान कटाई से पहले कैथल में 629 नोडल अधिकारी तैनात, पराली जलाई तो होगी FIR

धान कटाई से पहले कैथल में 629 नोडल अधिकारी तैनात

Kaithal News: धान कटाई का सीजन नजदीक आते ही कैथल जिला प्रशासन और कृषि विभाग पराली जलाने (फसल अवशेष प्रबंधन) की संभावित घटनाओं को लेकर बेहद सख्त रुख अपना रहा है। इस बार जिले भर में लगभग 4.5 लाख एकड़ रकबे में धान की फसल लहलहा रही है। कटाई के दौरान खेतों में आगजनी की एक भी घटना न हो, इसके लिए प्रशासनिक अमला अभी से धरातल पर उतर चुका है और गांव-गांव तक अधिकारियों की जवाबदेही तय कर दी गई है।

गांव स्तर पर बना सुरक्षा घेरा: कृषि से लेकर राजस्व विभाग तक मुस्तैद

अभियान को असरदार बनाने के लिए केवल कृषि विभाग ही नहीं, बल्कि बागवानी (हॉर्टिकल्चर), ग्राम सचिव, पटवारी, नहरी पटवारी, वन विभाग, मार्केट कमेटी और पशुपालन विभाग के कर्मचारियों को भी मैदान में उतारा गया है।

उप कृषि निदेशक डॉ. रविंद्र जाखड़ ने बताया कि जिला स्तर पर डॉ. सतीश नारा को मुख्य नोडल अधिकारी बनाया गया है, जबकि ब्लॉक और गांव स्तर पर 629 नोडल अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। व्यवस्था ऐसी बनाई गई है कि औसतन एक नोडल अधिकारी के जिम्मे करीब 100 किसान रहेंगे। ये अधिकारी किसानों से सीधे संपर्क में रहकर फसल अवशेष प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीकों के इस्तेमाल पर नजर रखेंगे।

सरपंचों और नंबरदारों के व्हाट्सएप ग्रुप से त्वरित रिपोर्टिंग

निगरानी तंत्र को और मजबूत करने के लिए प्रशासन ने गांव के प्रतिनिधियों यानी सरपंचों और नंबरदारों को इस मुहिम से जोड़ा है। ब्लॉकवार व्हाट्सएप ग्रुप तैयार किए गए हैं। जैसे ही किसी गांव में धुआं या आगजनी की सूचना मिलेगी, तुरंत इस ग्रुप में लोकेशन शेयर की जाएगी ताकि पास में मौजूद टीम मौके पर पहुंचकर कार्रवाई कर सके।

पिछले साल की सख्ती: 11 पर FIR, 75 अधिकारियों को थमाया था नोटिस

विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, बीते साल जिले में पराली जलाने से जुड़ी 72 शिकायतें आई थीं, जिनमें से जांच के बाद 11 स्थानों पर आगजनी की पुष्टि हुई थी। कृषि विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए 11 किसानों के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज करवाया था और 10 किसानों का 5 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से चालान कर जुर्माना वसूला था।

इतना ही नहीं, 11 किसानों के मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल पर ‘रेड एंट्री’ की गई थी, जिससे तीन साल के लिए उनकी सरकारी खरीद पर रोक लग जाती है। वहीं, ड्यूटी में ढिलाई बरतने वाले करीब 75 सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों को भी कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे।

जोन वाइज निगरानी: संवेदनशील इलाकों पर पैनी नजर

पिछले साल के रिकॉर्ड के आधार पर जिले को चार जोन में बांटा गया है। कलायत क्षेत्र का कैलरम गांव सबसे ज्यादा संवेदनशील होने के कारण ‘रेड जोन’ में रखा गया है। वहीं कैथल, गुहला और पूंडरी को ‘ग्रीन जोन’ में शामिल किया गया है, क्योंकि यहां मामलों की संख्या काफी कम रही थी। विभाग का कहना है कि कटाई के दौरान जिन इलाकों से जोखिम की सूचना मिलेगी, वहां तुरंत अतिरिक्त बल और अधिकारी तैनात किए जाएंगे।

यह भी पढ़ें– कैथल में सड़क हादसे में 15 साल के स्कूली छात्र की मौत, सुबह की सैर पर निकले मासूम को बाइक ने मारी टक्कर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed