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Kaithal Roadways News: कैथल रोडवेज का बुरा हाल: बसों की कमी से पुष्कर-बीकानेर जैसे बड़े रूट हुए बंद

AAmandeep Singh
कैथल रोडवेज का बुरा हाल: बसों की कमी से पुष्कर-बीकानेर जैसे बड़े रूट हुए बंद
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हरियाणा। हरियाणा रोडवेज, जिसे कभी अपनी रफ़्तार और सेवा के लिए जाना जाता था, आज कैथल में खुद रेंगने को मजबूर है। कैथल डिपो में बसों की भारी किल्लत के चलते कई महत्वपूर्ण और धार्मिक रूटों पर बसों का पहिया थम गया है। स्थिति यह है कि विभाग के पास परमिट तो मौजूद हैं, लेकिन उन्हें चलाने के लिए सड़कों पर उतारने लायक बसें नहीं हैं। इस वजह से वैद्यनाथ और पुष्कर जैसे पवित्र स्थलों के दर्शन के लिए निकलने वाले श्रद्धालुओं और राजस्थान के प्रमुख शहरों की यात्रा करने वाले यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

90 नई बसों का इंतजार, पुरानी दे रही हैं बीच रास्ते दगा

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डिपो के मौजूदा बेड़े पर नजर डालें तो तस्वीर काफी चिंताजनक है। कुल 160 बसों में से 100 से ज्यादा बसें अपनी उम्र पूरी कर चुकी हैं या फिर ‘खटारा’ होने की कगार पर हैं। करीब एक साल के भीतर 52 बसें कंडम घोषित कर बाहर का रास्ता दिखा दी गई हैं। जो 35 बसें बीएस-3 मॉडल की बची हैं, उनका अधिकांश समय सड़कों के बजाय वर्कशॉप में रिपेयरिंग में बीतता है। एनसीआर (NCR) क्षेत्र में भेजने के लिए विभाग के पास केवल 46 नई बीएस-6 बसें हैं, जो जिले की बढ़ती आबादी और मांग के आगे ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।

आमदनी पर असर और विभाग की बेबसी

बसों की कमी का सीधा असर रोडवेज के खजाने पर भी पड़ रहा है। रूट बंद होने और चक्कर (ट्रिप्स) कम होने से विभाग की दैनिक कमाई घट गई है। यात्रियों का कहना है कि लंबे समय से इन रूटों को दोबारा चालू करने की मांग की जा रही है, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। ग्रामीणों के लिए तो मुश्किलें और भी ज्यादा हैं क्योंकि लोकल रूटों पर चलने वाली पुरानी बसें अक्सर बीच रास्ते खराब हो जाती हैं, जिससे नौकरीपेशा और छात्रों का कीमती समय बर्बाद होता है।

कब सुधरेंगे हालात? विभाग का दावा

यातायात प्रबंधक विपुल कुमार ने इस संकट को स्वीकार करते हुए बताया कि नई बसों की डिमांड मुख्यालय को पहले ही भेजी जा चुकी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जुलाई तक करीब 10 नई बसें डिपो के बेड़े में शामिल हो सकती हैं, जिसके बाद प्राथमिकता के आधार पर बंद पड़े रूटों को बहाल किया जाएगा। हालांकि, 90 बसों की तत्काल जरूरत के मुकाबले 10 बसें कितनी राहत देंगी, यह बड़ा सवाल है। फिलहाल, कैथल के यात्री निजी वाहनों और डग्गामार बसों के भरोसे अपना सफर काटने को मजबूर हैं।

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