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कंगना रणौत के सख्त तेवर: अधिकारियों से बोलीं- बार-बार वही सुझाव आते हैं, अमल क्यों नहीं होता?

कंगना रणौत के सख्त तेवर, अधिकारियों से बोलीं- बार-बार वही सुझाव आते हैं, अमल क्यों नहीं होता?

कंगना रणौत ने अधिकारियों की लगाई क्लास

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VVinita Kohli

Kangana Ranaut: मंडी से सांसद कंगना रणौत ने जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को साफ संदेश दिया कि बैठकें सिर्फ कागजी औपचारिकता बनकर नहीं रहनी चाहिए। पिछली बैठकों में लिए गए फैसलों और दिए गए सुझावों पर अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर उन्होंने अधिकारियों की कार्यशैली पर नाराजगी जताई। कंगना ने कहा कि विकास योजनाओं को फाइलों और कागजों से निकालकर जमीन पर उतारना जरूरी है। उनका कहना था कि जब तक योजनाओं का वास्तविक लाभ लोगों तक हीं पहुंचेगा, तब तक बैठकों और योजनाओं का उद्देश्य पूरा नहीं होगा।

 

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‘आपके कानों पर जू नहीं रेंगती’, अधिकारियों से पूछा सवाल

बैठक के दौरान कंगना के तेवर काफी सख्त नजर आए। उन्होंने अधिकारियों से कहा, “बार-बार वही सुझाव आते हैं। उन पर अमल नहीं होता। आपके कानों पर जू नहीं रेंगती। सबका वक्त क्यों बर्बाद किया जा रहा है?” उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों को सामने आने के लिए भी कहा। कंगना का जोर इस बात पर रहा कि बैठकों में सिर्फ समस्याओं की चर्चा करने के बजाय पिछली बैठकों में तय कामों की प्रगति भी स्पष्ट रूप से बताई जाए।

 

केंद्र से राशि मिली, फिर भी काम क्यों अटके?

बैठक में उन विकास कार्यों को लेकर भी सवाल उठे, जिनके लिए केंद्र से राशि मिलने के बावजूद काम आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। भू-अधिग्रहण, विभिन्न अनुमतियों और NOC के अभाव में लंबित परियोजनाओं की स्थिति पर सांसद ने अधिकारियों से जवाब मांगा।
कंगना ने निर्देश दिए कि विकास कार्यों की वर्तमान स्थिति के आधार पर अलग-अलग सूचियां तैयार की जाएं। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कौन सा काम शुरू हो चुका है, कौन सा किस स्तर पर अटका है और उसके आगे बढ़ने में किस विभाग या अनुमति की जरूरत है।

 

हर लंबित काम के लिए बनेगा समयबद्ध एक्शन प्लान

सांसद ने प्रत्येक लंबित मामले के लिए समयबद्ध एक्शन प्लान तैयार करने को कहा। उनका उद्देश्य यह तय करना है कि किसी परियोजना की देरी की वजह क्या है और उसे आगे बढ़ाने के लिए अगला कदम कौन उठाएगा। कंगना ने अधिकारियों को यह भी स्पष्ट किया कि सिर्फ राशि वापस करने के निर्देश जारी कर देना पर्याप्त नहीं है। जब तक पैसा सरकारी खाते में वापस नहीं आ जाता, तब तक संबंधित काम को अधूरा ही माना जाएगा।

 

‘अब बातें नहीं, जमीन पर परिणाम चाहिए’

कंगना ने चेतावनी दी कि मंडी संसदीय क्षेत्र के विकास कार्यों पर पूरे देश की नजर है। ऐसे में विभागीय लापरवाही की वजह से गलत संदेश नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब केवल बैठकों में आश्वासन देने से काम नहीं चलेगा। विकास कार्यों में वास्तविक प्रगति जमीन पर दिखाई देनी चाहिए और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की रिपोर्ट उच्च स्तर पर भेजी जाएगी।

 

आम लोगों पर इसका क्या असर पड़ेगा?

मंडी संसदीय क्षेत्र में सड़क, बुनियादी ढांचे और दूसरी विकास परियोजनाओं के लिए मंजूर राशि का लाभ तभी लोगों तक पहुंचेगा, जब जमीन से जुड़ी अड़चनें समय पर दूर हों। भू-अधिग्रहण, NOC और प्रशासनिक मंजूरियों में देरी का सीधा असर परियोजनाओं की समयसीमा और आम लोगों को मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ता है। कंगना के निर्देशों के बाद अगर विभागवार जिम्मेदारी और समयसीमा तय होती है, तो लंबित परियोजनाओं की निगरानी आसान हो सकती है। अब यह देखना होगा कि बैठक में दिए गए निर्देशों के बाद अटके विकास कार्यों की गति कितनी बदलती है।

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