Karnal Primary Teachers AI Training: करनाल के सरकारी स्कूलों में एआई की एंट्री, 2,463 प्राइमरी शिक्षक बनेंगे ‘डिजिटल मास्टर’, एससीईआरटी ने शुरू की ट्रेनिंग
एआई जरनेटेड फोटो।
Karnal Primary Teachers AI Training: मुनीश मुंडे, करनाल। सरकारी प्राथमिक स्कूलों में छोटे बच्चों को पढ़ाने का ढर्रा अब बदलने जा रहा है। करनाल के सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में पारंपरिक पठन-पाठन के साथ अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की एंट्री हो चुकी है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) हरियाणा ने प्राथमिक शिक्षकों की कार्यकुशलता बढ़ाने और कक्षाओं को ज्यादा व्यावहारिक बनाने के लिए ‘डिजिटल टीचर कोर्स ऑन एआई बेसिक्स फॉर प्राइमरी टीचर्स’ नाम से एक विशेष प्रशिक्षण अभियान शुरू किया है।
इस पहल के तहत करनाल जिले में कार्यरत सभी 2,463 पीआरटी (प्राथमिक) शिक्षकों के लिए इस ट्रेनिंग प्रोग्राम में हिस्सा लेना अनिवार्य कर दिया गया है। शिक्षकों को एआई का व्यावहारिक इस्तेमाल सिखाया जाएगा ताकि वे कक्षा में बच्चों की उम्र और उनकी सीखने की क्षमता के हिसाब से पढ़ाई को अधिक रोचक और आसान बना सकें।
10 अक्टूबर तक रजिस्ट्रेशन जरूरी, 30 अक्टूबर तक पूरा करना होगा कोर्स
एससीईआरटी द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक, प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले के हर पीआरटी शिक्षक को दिए गए गूगल फॉर्म के जरिए 10 अक्टूबर 2026 तक अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा। वहीं, इस पूरे डिजिटल कोर्स को पूरा करने की अंतिम समय सीमा 30 अक्टूबर 2026 तय की गई है।
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) के एआई नोडल अधिकारी डॉ. देवेंद्र सिंह ने बताया कि शिक्षकों की सुविधा के लिए ब्लॉक स्तर पर एआई समन्वयकों (को-ऑर्डिनेटर्स) की तैनाती की गई है। ये समन्वयक शिक्षकों के रजिस्ट्रेशन से लेकर कोर्स पूरा करने तक हर कदम पर उनका मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग करेंगे।
कम समय में तैयार होंगी कहानियां और वर्कशीट, सुरक्षित इस्तेमाल पर रहेगा जोर
अक्सर शिक्षकों का काफी समय पारंपरिक तरीकों से टीचिंग मैटेरियल तैयार करने में निकल जाता है। इस ट्रेनिंग के बाद शिक्षक एआई टूल्स की मदद से मिनटों में बच्चों के स्तर के अनुसार आकर्षक कहानियां, गतिविधि-आधारित वर्कशीट, फ्लैश कार्ड्स और डायनेमिक लेसन प्लान तैयार कर सकेंगे। इससे एक ही क्लास में अलग-अलग क्षमता वाले बच्चों को उनकी जरूरत के हिसाब से पढ़ाना आसान हो जाएगा।
ट्रेनिंग का एक अहम पहलू ‘सुरक्षित और जिम्मेदार एआई’ का इस्तेमाल है। छोटे बच्चों की निजता और उनके मानसिक विकास को ध्यान में रखते हुए एआई का इस्तेमाल किस हद तक और कैसे किया जाए, इसकी स्पष्ट गाइडलाइन भी शिक्षकों को दी जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य कागजी काम और प्रशासनिक दिनचर्या में लगने वाले समय को घटाकर बच्चों के साथ सीधे संवाद और शिक्षण गतिविधियों के लिए अधिक समय बचाना है।
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