Karnal Police: करनाल में 8 पिस्तौल और 20 कारतूस के साथ 3 गिरफ्तार, जांच में सामने आए विदेशी नंबरों के सुराग
करनाल में 8 पिस्तौल और 20 कारतूस के साथ 3 गिरफ्तार
Karnal Police: मुनीश मुंडे, करनाल। करनाल में अवैध हथियारों की तस्करी और अपराध पर नकेल कसने के लिए चलाए जा रहे अभियान में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। सीआईए-3 की टीम ने एक अंतरराज्यीय हथियार सप्लाई नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को दबोचा है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे और उनकी निशानदेही पर 7 अवैध देसी पिस्टल, एक देसी कट्टा, 20 जिंदा कारतूस और वारदात में इस्तेमाल मोटरसाइकिल बरामद की है। पकड़े गए आरोपियों में मुख्य सप्लायर समेत दो मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान करनाल के कर्ण विहार निवासी विकास उर्फ विक्की और मध्य प्रदेश के दमोह जिले (तहसील पटेरा, गांव बटिया) के रहने वाले श्रवण ठाकुर व जागेश्वर उर्फ जग्गू लोधी के रूप में हुई है।
काछवा नहर पुल से हत्थे चढ़ा मुख्य आरोपी, एमपी से पकड़े गए सप्लायर
करनाल के पुलिस अधीक्षक करन गोयल (IPS) ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि 15 सितंबर को सीआईए-3 के प्रभारी निरीक्षक अजेय सागवान की टीम को गुप्त सूचना मिली थी। इसके आधार पर काछवा नहर पुल के पास घेराबंदी करके विकास उर्फ विक्की को पकड़ा गया। तलाशी लेने पर उसके पास से एक देसी कट्टा, एक पिस्टल, तीन जिंदा कारतूस और बाइक मिली। थाना सदर करनाल में आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज कर जब आरोपी को रिमांड पर लिया गया, तो खुलासा हुआ कि उस पर पहले से आर्म्स एक्ट और पॉक्सो (POCSO) समेत 7 आपराधिक मामले दर्ज हैं।
विकास से सख्ती से पूछताछ के दौरान मध्य प्रदेश से हथियार सप्लाई करने वाले मुख्य सरगना श्रवण ठाकुर का नाम सामने आया। इसके तुरंत बाद करनाल पुलिस की विशेष टीम ने 25 सितंबर को एमपी के दमोह स्थित गांव बटिया में दबिश देकर श्रवण ठाकुर और उसके साथी जागेश्वर उर्फ जग्गू लोधी को गिरफ्तार कर लिया।
7 दिन के रिमांड पर आरोपी, विदेशी नंबरों और फंडिंग की जांच में जुटी पुलिस
मध्य प्रदेश से पकड़े गए दोनों आरोपियों को 26 सितंबर को अदालत में पेश कर 7 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया। रिमांड के दौरान आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ की गई, जिसकी निशानदेही पर 6 और अवैध देसी पिस्टल तथा 17 जिंदा कारतूस बरामद हुए।
एसपी करन गोयल के मुताबिक, इस नेटवर्क की तह तक जाने पर कुछ बेहद चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच में हथियारों की फंडिंग और लॉजिस्टिक्स से जुड़े कुछ विदेशी मोबाइल नंबर और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के साक्ष्य मिले हैं। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश में जुटी है कि इन हथियारों का इस्तेमाल किस गैंग या वारदातों को अंजाम देने के लिए होना था और इसमें विदेश बैठे किसी गैंगस्टर या संगठित अपराध सिंडिकेट का हाथ तो नहीं है।
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