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Ashok Arora MLA Kurukshetra: कुरुक्षेत्र विवाद सुलझा: भाजपा पार्षद प्रतिनिधि ने विधायक अशोक अरोड़ा से लिखित में मांगी माफी

AAmandeep Singh
कुरुक्षेत्र विवाद सुलझा: भाजपा पार्षद प्रतिनिधि ने विधायक अशोक अरोड़ा से लिखित में मांगी माफी
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र की राजनीति में करीब एक साल से चल रहा घमासान अब शांत होता दिख रहा है। थानेसर नगर परिषद की बैठक में कांग्रेस विधायक अशोक अरोड़ा के साथ हुई बदसलूकी और हाथापाई के मामले में हरियाणा विधानसभा की प्रिवलेज कमेटी ने कड़ा रुख अपनाया। कमेटी के चेयरमैन मूलचंद शर्मा की मौजूदगी में भाजपा पार्षद प्रतिनिधि नरेंद्र शर्मा और नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी (EO) सहित चार लोगों ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए लिखित में माफीनामा पेश किया। इस माफी के साथ ही विधायक और पार्षद प्रतिनिधि के बीच चल रही कानूनी और राजनीतिक जंग का कानूनी समाधान निकाल लिया गया है।

मई 2025 की वो घटना: जब बैठक बन गई थी जंग का मैदान

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यह पूरा विवाद पिछले साल मई 2025 में शुरू हुआ था, जब थानेसर नगर परिषद की हाउस मीटिंग चल रही थी। विधायक अशोक अरोड़ा ने बैठक में पार्षदों के स्थान पर उनके प्रतिनिधियों (पार्षद पतियों या बेटों) की मौजूदगी पर कड़ी आपत्ति जताई थी। बहस इतनी बढ़ गई कि बात हाथापाई और धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। अशोक अरोड़ा ने आरोप लगाया था कि उन पर हुआ यह हमला पूर्व मंत्री सुभाष सुधा के इशारे पर किया गया था, क्योंकि उन्होंने परिषद में हुए कथित घोटालों की आवाज उठाई थी। दूसरी ओर, पार्षद प्रतिनिधि नरेंद्र शर्मा ने विधायक पर निजी रंजिश और दल-बदल के लिए दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप मढ़े थे।

अधिकारियों पर भी गिरी गाज: ईओ को भी मांगनी पड़ी माफी

मामला केवल जनप्रतिनिधियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रिवलेज कमेटी ने नगर परिषद के उन अधिकारियों को भी आड़े हाथों लिया जिन्होंने बैठक की गरिमा बनाए रखने में कोताही बरती। कमेटी ने ईओ और अन्य संबंधित कर्मचारियों को तलब किया, जिन्होंने अंततः लिखित में माफी मांगकर अपनी जान बचाई। विधायक अशोक अरोड़ा ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि संस्थागत मर्यादाओं को बचाने की थी। उन्होंने मांग की थी कि सरकारी बैठकों में बाहरी लोगों का दखल पूरी तरह बंद हो ताकि भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी पर लगाम लग सके।

विधानसभा में सख्त निर्देश: अब निकायों में नहीं चलेगा ‘प्रतिनिधि राज’

प्रिवलेज कमेटी के चेयरमैन मूलचंद शर्मा ने इस मामले के बाद एक महत्वपूर्ण सिफारिश की है। अब हरियाणा के किसी भी नगर निकाय या पंचायत समिति की बैठक में केवल निर्वाचित और अधिकृत प्रतिनिधि ही बैठ सकेंगे। यदि कोई बाहरी व्यक्ति या पार्षद प्रतिनिधि बैठक में पाया जाता है, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी वहां तैनात अधिकारियों की होगी। हालांकि, इस मामले की रिपोर्ट को लेकर विधानसभा के बजट सत्र में काफी हंगामा भी हुआ। विपक्षी दल कांग्रेस चाहती थी कि यह रिपोर्ट सदन के पटल पर पढ़ी जाए, लेकिन सत्ता पक्ष के विरोध और स्पीकर के इनकार के बाद केवल समझौते के साथ ही मामले को नत्थी कर दिया गया।

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