Kahan Gaye Wo Rishte Play Kurukshetra: आधुनिकता की अंधी दौड़ और भागदौड़ भरी जिंदगी में इंसानी रिश्ते किस कदर दम तोड़ रहे हैं, इसका जीवंत और बेहद मार्मिक नजारा कुरुक्षेत्र के कला कीर्ति भवन में देखने को मिला। हरियाणा कला परिषद के सौजन्य से कला सृष्टि मंच के कलाकारों ने नाटक ‘कहां गए वो रिश्ते’ का सफल मंचन किया। बृज किशोर शर्मा के कुशल निर्देशन में पिरोए गए इस नाटक ने वर्तमान समाज की स्वार्थी प्रवृत्ति और बुजुर्गों के प्रति घटती संवेदनाओं की ऐसी हकीकत पेश की, जिसे देख प्रेक्षागृह में बैठा हर दर्शक भावुक हो उठा।
बुजुर्गों का दर्द और बच्चों का स्वार्थ: दिल छू गई कहानी
नाटक का ताना-बाना एक बुजुर्ग दंपत्ति और उनके तीन बच्चों (दो बेटों और एक बेटी) के इर्द-गिर्द बुना गया था। सभी बच्चे शादीशुदा होने के बाद अपनी-अपनी जिंदगी और सहूलियतों में व्यस्त होकर माता-पिता से अलग रहने लगते हैं। कहानी में मोड़ तब आता है जब अचानक मां की तबीयत बिगड़ जाती है। बच्चों को जब घर बुलाया जाता है, तो कोई भी जिम्मेदारी उठाने या मां की सेवा करने को तैयार नहीं होता।
अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद जब इलाज के दौरान मां दम तोड़ देती है, तब भी बच्चों की संवेदनहीनता खत्म नहीं होती। वे शोक मनाने के बजाय चौथे के दिन ही सारी रस्में जल्दबाजी में निपटाकर अपने-अपने काम पर लौटने की होड़ में दिखते हैं। कलाकारों के सशक्त अभिनय और संवादों ने उपस्थित लोगों को आत्मचिंतन करने पर मजबूर कर दिया।
वीसी करतार धीमान और पूर्व मंत्री सुभाष सुधा ने की शिरकत
संवेदनशील सांस्कृतिक संध्या में श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति करतार धीमान ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। कार्यक्रम में अतिरिक्त उपायुक्त पंकज सेतिया, पूर्व राज्यमंत्री सुभाष सुधा, डॉ. रामेंद्र सिंह, उमा सुधा और डॉ. जयभगवान सिंगला विशिष्ट अतिथि के तौर पर शामिल हुए।
नाटक शुरू होने से पूर्व हरियाणा कला परिषद के उपाध्यक्ष महेश जोशी ने सभी अतिथियों का अंगवस्त्र पहनाकर और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता पौधा भेंट कर भव्य स्वागत किया। मंच संचालन का जिम्मा विकास शर्मा ने बखूबी संभाला।
टूटती परंपराओं के बीच एक जरूरी संदेश
नाटक के समापन पर अतिथियों और दर्शकों ने कलाकारों के अभिनय की जमकर सराहना की। वक्ताओं ने कहा कि आज के दौर में जब संयुक्त परिवार बिखर रहे हैं और बुजुर्ग एकाकीपन का शिकार हो रहे हैं, तब ऐसे नाटक समाज को सही दिशा दिखाने का काम करते हैं। ‘कहां गए वो रिश्ते’ केवल एक नाटक नहीं, बल्कि हर उस घर की कहानी है जहां आधुनिकता के नाम पर अपने ही संस्कारों और रिश्तों की बलि चढ़ाई जा रही है।

