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Kurukshetra News: अमेरिका से लौटकर संभाली थी खेती, कुरुक्षेत्र की डल्ला नहर में मिला बराड़ा के विश्वजीत का शव

GGaganpreet Kaur
Kurukshetra News: अमेरिका से लौटकर संभाली थी खेती, कुरुक्षेत्र की डल्ला नहर में मिला बराड़ा के विश्वजीत का शव

अमेरिका से लौटकर संभाली थी खेती, कुरुक्षेत्र की डल्ला नहर में मिला बराड़ा के विश्वजीत का शव

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Kurukshetra News: अंबाला के बराड़ा कस्बे से पांच दिन पहले लापता हुए 32 वर्षीय विश्वजीत सिंह के मामले का अंत बेहद दर्दनाक रहा। चार दिनों तक परिजनों और गोताखोरों द्वारा नहर का चप्पा-चप्पा खंगालने के बाद रविवार को विश्वजीत का शव कुरुक्षेत्र के झांसा के पास स्थित डल्ला माजरा साइफन से बरामद हुआ। जैसे ही शव मिलने की खबर आई, बराड़ा स्थित उनके घर में चीख-पुकार मच गई और परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। बराड़ा पुलिस ने शव को मुलाना के एमएम अस्पताल भिजवाया, जहां पोस्टमार्टम के बाद उसे परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।

नहर किनारे मिली थी बाइक और चश्मा, तभी से गहराया था हादसा होने का शक

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बराड़ा के वार्ड नंबर 9 की पार्षद प्रतिनिधि सतिन्द्र सिंह के अनुसार, 12 अगस्त को विश्वजीत बिना बताए घर से निकले थे। काफी खोजबीन के बाद जब कोई सुराग नहीं मिला, तो परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसके ठीक अगले दिन, 13 अगस्त को इस्माईलाबाद पुलिस की ओर से परिजनों को फोन आया कि डल्ला माजरा के पास नहर किनारे एक लावारिस बाइक, चश्मा और ड्राइविंग लाइसेंस पड़ा मिला है। परिजनों ने मौके पर पहुंचकर सामान की शिनाख्त विश्वजीत के रूप में की।

सामान मिलते ही विश्वजीत के नहर में डूबने की आशंका जताते हुए परिजनों ने निजी स्तर पर गोताखोरों की मदद ली। गोताखोरों की टीम ने लगातार चार दिनों तक सर्च ऑपरेशन चलाया। आखिरकार रविवार को घटनास्थल से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर डल्ला माजरा साइफन के पास से उनका शव बाहर निकाला गया।

धार्मिक मिजाज का था विश्वजीत, मछलियों को दाना डालते वक्त हादसे की आशंका

स्थानीय लोगों के मुताबिक विश्वजीत धार्मिक प्रवृत्ति के शांत इंसान थे। परिजनों को अंदेशा है कि वह 12 अगस्त की सुबह नहर पर मछलियों को आटे की गोलियां खिलाने गए होंगे और इसी दौरान संतुलन बिगड़ने या पैर फिसलने से नहर के तेज बहाव में बह गए।

विश्वजीत के पिता का वर्ष 2019 में ही निधन हो चुका था। परिवार में उनकी मां सुरिन्द्र कौर और एक शादीशुदा बहन है जो विदेश में रहती है। विश्वजीत खुद भी बेहतर भविष्य के लिए अमेरिका गए थे और वहां करीब पांच साल तक काम करने के बाद बराड़ा लौट आए थे। यहां आकर वह अपनी पुश्तैनी जमीन पर खेतीबाड़ी संभाल रहे थे और मां का सहारा बने हुए थे। गमगीन माहौल में कुरुक्षेत्र में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

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