Kurukshetra News: पवन शर्मा, ज्योतिसर। हरियाणा के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल ज्योतिसर तीर्थ के पास बुनियादी सुविधाओं का अभाव किस कदर आमजन पर भारी पड़ रहा है, इसकी बानोगी यहाँ का बंद पड़ा मुख्य मार्ग है। ज्योतिसर तीर्थ के ठीक सामने से कुरुक्षेत्र-ढांड रोड को आपस में जोड़ने वाला यह सीधा मार्ग पिछले करीब 9 वर्षों से पूरी तरह बंद है। कुरुक्षेत्र-नरवाना रेलवे लाइन के नीचे बने अंडरपास की बदहाली के कारण यह रास्ता अब किसी जोहड़ में तब्दील हो चुका है, जहाँ जलभराव के चलते पैदल निकलना भी असंभव हो गया है। प्रशासनिक और रेलवे अधिकारियों की अनदेखी के चलते स्थानीय जनता वर्षों से इस समस्या का दंश झेल रही है।
करीब एक दशक पहले रेलवे क्रॉसिंग पर यातायात को सुगम बनाने के लिए रेलवे लाइन के नीचे इस अंडरपास का निर्माण कराया गया था। स्थानीय निवासियों और किसानों का कहना है कि उस समय जिस जमीन से यह रास्ता गुजरता था, उसके मालिक ने निर्माण कार्य पर आपत्ति जताते हुए अदालत में मामला दायर कर दिया था, जिसके बाद से इस रास्ते पर कानूनी अड़चनें आ गईं और इसका इस्तेमाल बंद हो गया। हालांकि, ग्रामीणों का दावा है कि संबंधित व्यक्ति ने बाद में अदालत से अपना केस वापस ले लिया था, लेकिन इसके बावजूद न तो अंडरपास से पानी निकासी के इंतजाम किए गए और न ही इस महत्वपूर्ण मार्ग को दोबारा बहाल किया गया।
किसानों और तीर्थयात्रियों की बढ़ गई मुश्किलें
इस रास्ते के बंद होने का सबसे बुरा असर उन किसानों पर पड़ रहा है, जिनकी जमीनें और खेत ढांड रोड की तरफ स्थित हैं। ज्योतिसर गांव के लोगों को अपने खेतों तक पहुँचने के लिए अब भारी फेरबदल करना पड़ता है। पूर्व सरपंच केहर सिंह, पूर्व सरपंच राजेश गुर्जर और लखविंदर सिंह ने बताया कि पहले यह मार्ग आवागमन के लिए बेहद सुगम और सीधा जरिया था। इसके चालू रहने से किसानों के साथ-साथ आसपास के गांवों के लोगों का समय और ईंधन दोनों बचते थे।
इसके अलावा, दूर-दराज से ज्योतिसर तीर्थ पर आने वाले श्रद्धालुओं को भी इस बंद रास्ते के कारण भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। सीधा रास्ता न होने के कारण यात्रियों और स्थानीय लोगों को अपने गंतव्य तक पहुँचने के लिए करीब 10 किलोमीटर का लंबा चक्कर काटकर जाना पड़ रहा है। राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में भी यह सीधा रास्ता दर्ज है, लेकिन अंडरपास के पास बनाए गए घुमावदार डिजाइन और आपत्तियों के कारण यह प्रोजेक्ट बीच मझधार में अटक कर रह गया।
प्रशासन से बार-बार गुहार के बावजूद स्थिति जस की तस
ग्रामीणों का कहना है कि वे इस समस्या को लेकर कई बार स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल कोरे आश्वासन ही मिले हैं। कोर्ट से मामला वापस लिए जाने के बाद ग्रामीणों में यह उम्मीद जगी थी कि शायद अब यह रास्ता खुल जाएगा, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
आज हालात यह हैं कि न तो अंडरपास उपयोग के लायक बचा है और न ही पुराना वैकल्पिक मार्ग सुचारੁ है। क्षेत्र के लोगों ने एक बार फिर कड़ा रोष व्यक्त करते हुए मांग की है कि प्रशासनिक अधिकारी और रेलवे विभाग आपसी समन्वय बनाकर इस मार्ग का तुरंत निरीक्षण करें। अंडरपास में भरे पानी को निकालकर और रास्ते की कानूनी-तकनीकी बाधाओं को दूर कर इसे जल्द से जल्द चालू किया जाए, ताकि किसानों, श्रद्धालुओं और आम जनता को इस लंबी परेशानी से मुक्ति मिल सके।
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