Breaking News
Magha Shraddha 2026: 7 अक्टूबर को है मघा श्राद्ध, जानें द्वादशी तिथि पर तर्पण का शुभ समय और नियमKaithal Nursing Staff Strike: ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ कैथल में नर्सिंग स्टाफ का हल्लाबोल, 5 से 7 अक्टूबर तक हड़तालMahendragarh : हकेवि की डॉ. सुमन रानी को मिला ‘श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड’, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानितNarnaul: हरियाणा के सभी जिलों में 8 अक्ट्रबर को होगा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ विशाल रोष मार्चCEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं कियाMagha Shraddha 2026: 7 अक्टूबर को है मघा श्राद्ध, जानें द्वादशी तिथि पर तर्पण का शुभ समय और नियमKaithal Nursing Staff Strike: ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ कैथल में नर्सिंग स्टाफ का हल्लाबोल, 5 से 7 अक्टूबर तक हड़तालMahendragarh : हकेवि की डॉ. सुमन रानी को मिला ‘श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड’, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानितNarnaul: हरियाणा के सभी जिलों में 8 अक्ट्रबर को होगा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ विशाल रोष मार्चCEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं किया

Ladwa Music Workshop: लाडवा के वृद्धाश्रम में गूंजीं सरगम की तानें, संगीत कार्यशाला में 6 साल के बच्चे और 70 साल के बुजुर्ग एक साथ सीख रहे सुर

GGaganpreet Kaur
लाडवा के वृद्धाश्रम में गूंजीं सरगम की तानें, संगीत कार्यशाला में 6 साल के बच्चे और 70 साल के बुजुर्ग एक साथ सीख रहे सुर
शेयर करें
AI Quick Summary

Want to save time? Let our AI read the article and give you 3 quick bullet points.

Listen to this article
AUDIO VERSION

लाडवा (कैलाश गोयल)। संगीत की कोई उम्र नहीं होती और न ही सीखने की कोई सीमा। इस बात की जीवंत बानगी इन दिनों लाडवा के बाबा बंसी वाला वृद्धाश्रम में देखने को मिल रही है। हरियाणा कला परिषद और भारत विकास परिषद लाडवा के संयुक्त तत्वावधान में चल रही 15 दिवसीय गीत-संगीत कार्यशाला अब अपने पूरे रंग में आने लगी है। बुधवार को कार्यशाला के तीसरे दिन प्रतिभागियों के भीतर एक अलग ही ऊर्जा और उत्साह का माहौल नजर आया। आश्रम का परिसर सुबह और शाम, दोनों वक्त हारमोनियम की तान, ढोलक की थाप और तबले की थाप से सराबोर हो रहा है।

इस कार्यशाला में मुख्य प्रशिक्षक और जाने-माने संगीत निर्देशक दिलावर कौशिक बारीकी से कमान संभाले हुए हैं। वे प्रतिभागियों को केवल गाना ही नहीं सिखा रहे, बल्कि वाद्य यंत्रों—जैसे हारमोनियम, तबला, ढोलक और कीबोर्ड—पर उंगलियां फिराने और सही नोट पकड़ने का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दे रहे हैं।

विज्ञापन

कला परिषद के उपाध्यक्ष ने सिखाया रियाज का महत्व; संगीत को बताया रूह की खुराक

तीसरे दिन के विशेष सत्र में हरियाणा कला परिषद के उपाध्यक्ष महेश जोशी ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। युवा और बुजुर्ग साधकों के बीच बैठकर उन्होंने संगीत की दुनिया के अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने कहा कि संगीत केवल मनोरंजन या शौक का जरिया नहीं है, बल्कि यह इंसान के व्यक्तित्व के विकास और हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जिंदा रखने का सबसे सशक्त माध्यम है।

महेश जोशी ने प्रशिक्षण ले रहे विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि संगीत एक साधना है, जिसमें बिना नियमित रियाज, कड़े अनुशासन और समर्पण के महारत हासिल नहीं की जा सकती। उनके इस संबोधन ने कार्यशाला में मौजूद बच्चों और बड़ों दोनों में एक नया जोश भर दिया, जिसके बाद सभी ने मिलकर स्वर साधना, ताल-लय और समूह गायन (कोरस) का सघन अभ्यास किया।

एक ही जाजम पर बचपन और अनूठा बुढ़ापा, संवर रही हैं शामें

इस पूरी कार्यशाला का सबसे खूबसूरत और भावुक कर देने वाला पहलू इसकी विविधता है। इस मंच पर जहां 6 साल के नौनिहाल अपनी तोतली और मासूम आवाज में सरगम सीख रहे हैं, वहीं 70 साल के बुजुर्ग भी अपनी जिंदगी के इस पड़ाव पर सुरों से खुद को तरोताजा कर रहे हैं। वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्गों के लिए यह आयोजन किसी उत्सव से कम नहीं है। उन्होंने इस पूरी पहल की दिल खोलकर तारीफ की है और कहा कि भजनों और गीतों की इस गूंज ने आश्रम के वातावरण को बेहद खुशनुमा और सकारात्मक बना दिया है।

भारत विकास परिषद लाडवा और आश्रम प्रबंधन ने संयुक्त रूप से बताया कि इस अनूठी कार्यशाला को शुरू करने के पीछे का असल मकसद नई पीढ़ी को पाश्चात्य संस्कृति के शोर से दूर रखकर भारतीय शास्त्रीय और सुगम संगीत की जड़ों से जोड़ना है। यह कार्यशाला आगामी 28 जून तक बिना किसी रुकावट के प्रतिदिन दो अलग-अलग शिफ्टों में चलाई जा रही है। सुबह का सत्र तड़के 5 बजे से 7 बजे तक चलता है, जो कंठ साधना (वेडिंग रियाज) के लिए सर्वोत्तम माना जाता है, जबकि शाम का सत्र दोपहर बाद 3 बजे से 5 बजे तक आयोजित हो रहा है।

विज्ञापन

कुरुक्षेत्र की और ख़बरें

ताज़ा ख़बरें सीधे अपने ईमेल पर

जगमार्ग न्यूज़ की बड़ी ख़बरें रोज़ अपने इनबॉक्स में पाएं। मुफ़्त, कभी भी अनसब्सक्राइब करें।