Mandi Board scam Punjab High Court : चंडीगढ़ में दाखिल की गई इस जनहित याचिका के मुताबिक, यह पूरा विवाद ग्रामीण सड़कों के निर्माण और भुगतानों से जुड़ा हुआ है। गुरदासपुर के रहने वाले याचिकाकर्ता रंजीत सिंह ने अदालत को बताया कि मंडी बोर्ड में नियमों को ताक पर रखकर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं की गई हैं।
याचिका में मुख्य आरोप यह लगाया गया है कि जिन सड़कों को लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) पहले ही बना चुका था, उन्हीं सड़कों के लिए मंडी बोर्ड की तरफ से फिर से टेंडर जारी कर दिए गए। आरोप है कि एक ही सड़क के निर्माण कार्य के नाम पर दो बार भुगतान किया गया, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का चूना लगा है।
प्रशासनिक बदलाव और बिना जांच के कार्य सौंपने पर सवाल
मामले में प्रशासनिक फैसलों पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। याचिका के अनुसार, सितंबर 2026 में मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद काहनूवान और कलानौर समेत 10 मार्केट कमेटियों के काम अचानक पंजाब मंडी बोर्ड को सौंप दिए गए थे।
याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष यह सवाल उठाया है कि प्रशासनिक नियंत्रण में यह बड़ा बदलाव करने से पहले किसी सक्षम अधिकारी की मंजूरी या कोई तकनीकी व वित्तीय जांच क्यों नहीं कराई गई? बिना किसी उचित प्रक्रिया के इन कार्यों को स्थानांतरित करने से वित्तीय गड़बड़ियों की आशंका बढ़ गई है।
स्वतंत्र एजेंसी से जांच और भुगतानों पर रोक की मांग
इस पूरे प्रकरण की गहराई से और निष्पक्ष पड़ताल करने के लिए अदालत से गुहार लगाई गई है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि इस पूरे 500 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए, जिसमें मंडी बोर्ड के इंजीनियर-इन-चीफ जतिंदर भंगू की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच हो।
इसके साथ ही अदालत से यह भी अपील की गई है कि जब तक इस मामले की पूरी जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक इन विवादित कार्यों से जुड़े नए टेंडरों और किसी भी तरह के भुगतानों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। हाईकोर्ट के इस सख्त नोटिस के बाद राज्य सरकार और मंडी बोर्ड के अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

