नई दिल्ली: मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड ने बुधवार को गुजरात स्थित अपनी इन-प्लांट रेलवे साइडिंग को वेरा की वेरिफाइड कार्बन स्टैंडर्ड पहल के तहत दुनिया की पहली मोडल शिफ्ट परिवहन परियोजना के रूप में मान्यता मिलने की घोषणा की। कंपनी ने बताया कि गुजरात इकाई के भीतर विकसित रेल पटरी सुविधा के माध्यम से अब वाहनों की आपूर्ति सड़क के बजाय रेल मार्ग से की जा रही है। इस कदम से लॉजिस्टिक्स ढांचे में संरचनात्मक बदलाव आया है और परिवहन के तरीके को अधिक टिकाऊ बनाया गया है।
परियोजना को वैश्विक मान्यता
Verra एक वैश्विक गैर-लाभकारी संगठन है जो जलवायु कार्रवाई और सतत विकास के लिए मानक विकसित और प्रबंधित करता है। उसके Verified Carbon Standard कार्यक्रम के तहत इस पहल को आधिकारिक रूप से पंजीकृत किया गया है। यह कार्यक्रम दुनिया का अग्रणी स्वैच्छिक ग्रीनहाउस गैस क्रेडिटिंग ढांचा माना जाता है और उच्च विश्वसनीयता वाले कार्बन क्रेडिट जारी करता है।
कार्बन क्रेडिट का अनुमान
कंपनी के अनुसार वित्त वर्ष 2023-24 से 2032-33 तक दस वर्ष की अवधि में सड़क से रेल की ओर डिस्पैच स्थानांतरित करने से करीब 1.7 लाख कार्बन क्रेडिट अर्जित होने की उम्मीद है। स्वतंत्र सत्यापन के बाद वेरा इसी मात्रा में कार्बन क्रेडिट जारी करेगा। यह अनुमान वास्तविक उत्सर्जन बचत के आकलन पर आधारित है।
उत्सर्जन में कमी और दक्षता
प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी हिसाशी ताकेउची ने कहा कि सड़क से रेल की ओर आपूर्ति स्थानांतरित करना व्यापक परिचालन दक्षता और पर्यावरणीय जिम्मेदारी को साथ आगे बढ़ाने का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि रेल परिवहन की अंतर्निहित दक्षता का लाभ उठाते हुए गुजरात संयंत्र में लॉजिस्टिक्स परिचालन के कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। इससे सड़क जाम घटा है और जीवाश्म ईंधन की कुल खपत में भी कमी आई है।
गुजरात संयंत्र से आपूर्ति
Maruti Suzuki India Limited ने बताया कि मार्च 2023 में संचालन शुरू होने के बाद से गुजरात की इस रेलवे साइडिंग के जरिये छह लाख से अधिक वाहनों की आपूर्ति की जा चुकी है। ताकेउची ने कहा कि यह उपलब्धि भारत के शुद्ध शून्य उत्सर्जन लक्ष्यों के अनुरूप उद्योग मानक स्थापित करने की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है और स्थिरता यात्रा में महत्वपूर्ण कदम साबित होती है। अतिरिक्त रूप से कंपनी का मानना है कि यह मॉडल भविष्य में हरित आपूर्ति श्रृंखला को बढ़ावा देगा और परिवहन क्षेत्र में कम कार्बन विकल्प अपनाने की दिशा में प्रेरित करेगा। देश भर।

