MDU Rohtak Protest: रोहतक MDU में छात्रों का फूटा गुस्सा, 10% फीस बढ़ोतरी के खिलाफ गेट पर जड़ा ताला, VC के खिलाफ नारेबाजी

रोहतक MDU में छात्रों का फूटा गुस्सा, 10% फीस बढ़ोतरी के खिलाफ गेट पर जड़ा ताला, VC के खिलाफ नारेबाजी
MDU Rohtak Protest: हरियाणा की प्रमुख शैक्षणिक संस्था महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (MDU), रोहतक एक बार फिर छात्र आंदोलनों का अखाड़ा बन गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन की अनदेखी और संवादहीनता से नाराज छात्रों का सब्र का बांध आखिरकार टूट गया। ‘मिशन इक्वेलिटी स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन’ और अन्य सहयोगी छात्र गुटों ने मिलकर सोमवार को एमडीयू के मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया और प्रशासनिक भवन के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रशासनिक रवैये से खफा छात्र नेताओं ने कुलपति के खिलाफ जमकर गुबार निकाला।
‘हर साल 10% फीस वृद्धि का नियम छात्र विरोधी’
प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे छात्र संगठन के जनरल सेक्रेटरी नकुल ने बताया कि वर्ष 2022 में एग्जीक्यूटिव काउंसिल (EC) की बैठक में एक ऐसा प्रस्ताव पास किया गया था, जो हर साल छात्रों की जेब पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त बोझ डालता है।
नकुल के मुताबिक, यदि किसी व्यावसायिक या उच्च शिक्षा कोर्स की सालाना फीस 50 हजार या 70 हजार रुपये है, तो इस नियम के चलते अगले वर्ष वही फीस बढ़कर 55 हजार या 77 हजार रुपये हो जाती है। यह नीति मध्यम और गरीब वर्ग के प्रतिभावान विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा से महरूम करने जैसी है, जिसे तुरंत निरस्त किया जाना चाहिए।
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी की तर्ज पर मिले हॉस्टल छूट, भर्ती में पारदर्शिता की मांग
छात्रों की दूसरी मुख्य मांग आर्थिक रूप से कमजोर (BPL) परिवारों से आने वाले विद्यार्थियों को राहत दिलाने से जुड़ी है। नकुल ने कहा कि कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी का उदाहरण सामने है, जहां बीपीएल श्रेणी के छात्र-छात्राओं को हॉस्टल फीस में 50 प्रतिशत तक की छूट दी जाती है। एमडीयू में भी यह राहत तुरंत लागू होनी चाहिए। इसके अलावा, बीते 22 जुलाई को निकाली गई प्रोफेसर भर्तियों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया गया कि विज्ञापन में किस विभाग में कितने पद खाली हैं, इसका कोई स्पष्ट ब्योरा नहीं दिया गया और भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण नियमों की भी सरेआम अनदेखी की जा रही है।
‘वीसी डमी, प्रशासनिक तंत्र पर उठे सवाल’
पिछले 12 दिनों से बिना किसी सुनवाई के धरने पर बैठे छात्रों ने विश्वविद्यालय के प्रशासनिक नेतृत्व पर कड़ा हमला बोला। छात्र नेता ने कहा कि एमडीयू प्रशासन की कार्यप्रणाली पूरी तरह ढुलमुल हो चुकी है और कुलपति मात्र ‘डमी’ बनकर रह गए हैं। अधिकारियों द्वारा बार-बार दिए जाने वाले आश्वासन केवल कागजी साबित हो रहे हैं। संवादहीनता के इस माहौल के कारण ही मजबूरन छात्रों को कड़े कदम उठाने पड़ रहे हैं।
मांगें न मानीं तो राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी
गेट पर ताला जड़ने के बाद छात्र नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यह तो केवल शुरुआत है। यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने समय रहते उनकी वाजिब मांगों पर संज्ञान लेकर ठोस फैसला नहीं लिया, तो इस आंदोलन को केवल रोहतक तक सीमित नहीं रखा जाएगा। आने वाले दिनों में हरियाणा के सभी जिलों और विश्वविद्यालयों के छात्र संगठनों को एकजुट कर एक बड़ा राज्यव्यापी आंदोलन खड़ा किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी एमडीयू प्रशासन की होगी।
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