August 21, 2026

Sonipat News: ACB की रेड की भनक लगते ही एसआई ने छत से लगाई छलांग, दोनों पैर टूटे

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Sonipat News: ACB की रेड की भनक लगते ही एसआई ने छत से लगाई छलांग, दोनों पैर टूटे

ACB की रेड की भनक लगते ही एसआई ने छत से लगाई छलांग, दोनों पैर टूटे

Sonipat News: सोनीपत जिले के खरखौदा थाना परिसर और उसके ठीक बाहर की आबोहवा में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसकी बानगी देखने को मिली। सिसाना गांव के एक ग्रामीण से युवती के साथ छेड़छाड़ के मामले को निपटाने और केस में न फंसाने की एवज में ₹20,000 की मांग की जा रही थी। सौदा ₹8,000 में तय हुआ। पीड़ित भ्रष्टाचार के आगे झुकने को तैयार नहीं था, लिहाजा उसने मामले की सीधी शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो को सौंप दी।

चाय वाले के जरिए चल रहा था वसूली का खेल

शिकायत की पुष्टि और वॉयस रिकॉर्डिंग मिलने के बाद एसीबी की टीम ने जाल बिछाया। शिकायतकर्ता को तय रणनीति के तहत खरखौदा थाने के ठीक सामने स्थित चाय की दुकान पर भेजा गया। जैसे ही शिकायतकर्ता ने चाय दुकानदार राकेश को ₹8,000 थमाए, आसपास सादे कपड़ों में मुस्तैद एसीबी की टीम ने उसे दबोच लिया। पूछताछ में तुरंत साफ हो गया कि यह रकम थाने में तैनात एसआई हरिप्रकाश की शह पर ही ली जा रही थी।

छत से कूदा सब-इंस्पेक्टर, दोनों पैर टूटे

जैसे ही चाय वाले के पकड़े जाने की भनक थाना परिसर में फैली, एसआई हरिप्रकाश के हाथ-पांव फूल गए। गिरफ्तारी के खौफ में वह भागकर थाने की ऊपरी मंजिल की छत पर चढ़ गया और वहां से सीधे नीचे छलांग लगा दी। अंधेरे के कारण काफी देर तक किसी को कुछ समझ नहीं आया, लेकिन जब जनरेटर के पीछे से कराहने की आवाज आई तो पुलिसकर्मी वहां पहुंचे। कूदने की वजह से एसआई के दोनों पैर टूट चुके थे। पुलिसकर्मियों ने अफरा-तफरी के बीच उसे उठाकर तुरंत खरखौदा के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया।

पुराना है आरोपी एसआई का दागदार रिकॉर्ड, लेडी एसआई भी जांच के घेरे में

यह पहली बार नहीं है जब एसआई हरिप्रकाश की नीयत पर सवाल उठे हों। साल 2016 में जब वह राजीव गांधी एजुकेशन सिटी (राई चौकी) का इंचार्ज था, तब उस पर ₹3,500 की मंथली मांगने का आरोप लगा था और विजिलेंस ने उसके खिलाफ केस दर्ज किया था। एसीबी अधिकारियों के मुताबिक, मामले में एसआई और चाय वाले दोनों पर पर्चा दर्ज कर उन्हें अरेस्ट कर लिया गया है।

दिलचस्प बात यह है कि इस केस की असली जांच अधिकारी लेडी एसआई सविता थीं, जो किसी काम से बाहर जाते वक्त प्रभार हरिप्रकाश को सौंप गई थीं। अब एसीबी इस पूरे षड्यंत्र में लेडी एसआई की भूमिका की भी बारीकी से पड़ताल कर रही है।

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