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Mohit Mittan UPSC Rank 717: कई बार असफलता के बाद मिली सफलता, पानीपत के मोहित की प्रेरक कहानी

AAmandeep Singh
कई बार असफलता के बाद मिली सफलता, पानीपत के मोहित की प्रेरक कहानी
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पानीपत। हरियाणा के पानीपत जिले के गांव बड़ौली से एक प्रेरक खबर सामने आई है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की वर्ष 2025 की परीक्षा के घोषित परिणाम में गांव के रहने वाले मोहित मिट्टान ने 717वीं रैंक हासिल की है। किसान परिवार से आने वाले मोहित की इस उपलब्धि से उनके घर के साथ पूरे गांव में खुशी का माहौल है।

ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक में सफलता हासिल करने पर इलाके के लोग भी उन्हें बधाई दे रहे हैं। गांव के युवाओं के बीच उनकी मेहनत और संघर्ष की चर्चा हो रही है।

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गांव के सरकारी स्कूल से शुरू हुआ पढ़ाई का सफर

मोहित मिट्टान ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव बड़ौली के सरकारी स्कूल से की। उन्होंने पांचवीं कक्षा तक यहीं शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद छठी कक्षा में उन्होंने पानीपत स्थित आर्य बाल भारती स्कूल में दाखिला लिया और वहीं से बारहवीं तक की पढ़ाई पूरी की।

स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की। इसी दौरान उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी का फैसला किया।

अंतिम प्रयास में मिली बड़ी सफलता

मोहित के अनुसार UPSC की यह परीक्षा उनका अंतिम प्रयास था। इससे पहले उन्होंने कई बार परीक्षा दी, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। लगातार असफलताओं के बाद उनका आत्मविश्वास कुछ कम जरूर हुआ, लेकिन उन्होंने तैयारी नहीं छोड़ी।

उन्होंने अपनी पढ़ाई मुख्य रूप से ऑनलाइन माध्यम से जारी रखी। लगातार अभ्यास और मेहनत के बाद आखिरकार उन्हें इस बार 717वीं रैंक हासिल हुई।

किसान पिता ने पढ़ाई के लिए लिया ऋण

मोहित के पिता ओमप्रकाश किसान हैं और खेती से ही परिवार का गुजारा चलता है। आर्थिक स्थिति सामान्य होने के बावजूद उन्होंने बेटे की पढ़ाई में किसी तरह की कमी नहीं आने दी।

बताया जाता है कि बेटे की पढ़ाई जारी रखने के लिए उन्होंने ऋण लेकर भी सहयोग किया। मोहित की माता गृहिणी हैं और घर की जिम्मेदारियां संभालते हुए हमेशा उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित करती रहीं।

परिवार का सहयोग बना ताकत

मोहित ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और परिवार को दिया। उनका कहना है कि जब भी तैयारी के दौरान निराशा हुई, परिवार ने उनका हौसला बढ़ाया।

मोहित का एक जुड़वा भाई भी है, जो फिलहाल पढ़ाई कर रहा है। मोहित की उपलब्धि अब गांव और आसपास के इलाकों के युवाओं के लिए नई प्रेरणा बन रही है।

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