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Varun Mulana Signature Campaign: छछरौली में बाढ़ के खिलाफ सांसद वरुण मुलाना की हुंकार: खानूवाला से शुरू किया बड़ा हस्ताक्षर अभियान

GGaganpreet Kaur
छछरौली में बाढ़ के खिलाफ सांसद वरुण मुलाना की हुंकार: खानूवाला से शुरू किया बड़ा हस्ताक्षर अभियान
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यमुनानगर। हरियाणा के यमुनानगर जिले के अंतर्गत आने वाले छछरौली क्षेत्र को हर साल अपनी चपेट में लेने वाली बाढ़ और जलभराव की त्रासदी के खिलाफ अब सियासी जमीन सुलगने लगी है। अंबाला संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस सांसद वरुण मुलाना ने इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान की मांग को लेकर रविवार को सीमावर्ती गांव खानूवाला से एक व्यापक हस्ताक्षर अभियान का बिगुल फूंक दिया। सोम नदी के ठीक किनारे आयोजित इस रोष प्रदर्शन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं, स्थानीय किसान संगठनों और ग्रामीणों ने भारी हुजूम के साथ शिरकत की। प्रदर्शनकारियों ने प्रदेश सरकार की ढीली प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मांग की कि आगामी मानसून की पहली बारिश से पहले क्षेत्र में प्रभावी बाढ़ रोधी इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं।

“करोड़ों का बजट फाइलों में दफन, धरातल पर सफाई शून्य”; नदियों की बदहाली पर बरसे सांसद

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ग्रामीणों को संबोधित करते हुए सांसद वरुण मुलाना ने सूबे की जल प्रबंधन नीतियों पर तीखे सवाल दागे। मुलाना ने आरोप लगाया कि सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग की लापरवाही के कारण इस पूरे अंचल के लोग हर साल अपनी गाढ़ी कमाई की फसलें और आशियाने खो देते हैं। उन्होंने कहा कि बरसाती मौसम शुरू होने को है, लेकिन अभी तक नदियों, प्राकृतिक खालों और ड्रेनों की गाद (सफाई) निकालने का काम कागजों से बाहर नहीं आ सका है। तटबंधों को दुरुस्त करने के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है, जिसका नतीजा यह होता है कि पहली ही भारी बारिश में उफनती नदियों का पानी गांवों और खेतों में तबाही मचाने लगता है।

दो महीने तक बेघर रहे थे ग्रामीण; पिछली बाढ़ के जख्मों को याद कर भावुक हुए लोग

सांसद ने वर्ष 2024 में आई भीषण बाढ़ की भयावहता की याद दिलाते हुए प्रशासनिक दावों की पोल खोली। उन्होंने कहा कि पिछली बरसातों में सोम नदी का किनारा टूटने के चलते अकेले खानूवाला गांव में पांच से छह फीट तक पानी जमा हो गया था। हालात इस कदर बेकाबू हो गए थे कि पूरे गांव को करीब दो महीने तक अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित ठिकानों पर शरणार्थी बनकर रहना पड़ा था। वरुण मुलाना ने सवाल उठाया कि जब सरकार हर साल बाढ़ बचाव के नाम पर करोड़ों रुपये का बजट पास करने का ढिंढोरा पीटती है, तो फिर धरातल पर वह पैसा किस ड्रेन में बह जाता है? इसका जवाब चंडीगढ़ में बैठे हुक्मरानों को देना होगा।

राजभवन तक गूंजेगी जनता की आवाज, मांग पूरी न होने पर चंडीगढ़ तक पैदल मार्च की चेतावनी

वरुण मुलाना ने आंदोलन की अगली रूपरेखा साफ करते हुए बताया कि इस हस्ताक्षर अभियान के जरिए पूरे क्षेत्र के प्रभावित लोगों की आवाज को एकजुट किया जा रहा है। इन हस्ताक्षरों के साथ एक विस्तृत मांग पत्र (ज्ञापन) तैयार कर सीधे हरियाणा के राज्यपाल को सौंपा जाएगा। उन्होंने सरकार को दोटूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि अगर राजभवन के हस्तक्षेप के बाद भी प्रशासन की कुंभकर्णी नींद नहीं टूटी, तो कांग्रेस इस मुद्दे को ठंडे बस्ते में नहीं जाने देगी। इसके बाद इलाके के किसानों और प्रभावित जनता को साथ लेकर यमुनानगर से चंडीगढ़ विधानसभा तक एक विशाल पैदल मार्च निकाला जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। इस मौके पर कई पूर्व विधायक, जिला पार्षद और किसान नेता मौजूद रहे।

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