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प. बंगाल की मतदाता सूची से ‘50 लाख से अधिक घुसपैठियों’ के नाम हटाए गए: नितिन नवीन

JJagmarg Desk
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कूच बिहार: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने रविवार को दावा किया कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से 50 लाख से अधिक घुसपैठियों के नाम हटाये गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में अवैध प्रवासियों का समय समाप्त हो गया है।

नवीन का यह बयान पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची के प्रकाशन के एक दिन बाद आया है, जिसमें 63.66 लाख नाम हटा दिए गए हैं। कूच बिहार में पार्टी की ‘परिवर्तन यात्रा’ को रवाना करने से पहले आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए नवीन ने दावा किया कि जिन्हें मतदाता सूची से हटाया गया है वे घुसपैठिए थे, जो सरकारी नौकरियों और वास्तविक नागरिकों के लिए बनी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे थे।

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उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से 50 लाख से अधिक घुसपैठियों के नाम हटाए गए हैं। ये घुसपैठिए न केवल वैध नागरिकों के अधिकारों का हनन कर रहे थे, बल्कि देश की सुरक्षा को भी खतरे में डाल रहे थे। नवीन ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर अवैध प्रवासियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया। उन्होंने साथ ही बनर्जी पर यह आरोप भी लगाया कि उन्होंने फर्जी दस्तावेज प्राप्त करने में मदद करके घुसपैठियों को संरक्षण प्रदान किया है।

नवीन ने तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व पर तीखा हमला करते हुए कहा कि ममता बनर्जी ने मतदाता सूची में घुसपैठियों को बचाने के लिए अदालतों का रुख किया, क्योंकि वे उनकी पार्टी का वोट बैंक हैं। इन घुसपैठियों के लिए आप आधी रात को भी अदालतों का रुख करते हैं। फिर, जब महिलाओं को अपमान का सामना करना पड़ता है, तो आप नजरें चुरा लेते हैं।

उन्होंने कहा कि घुसपैठियों को हमारा संदेश है कि अब उन्हें बंगाल की धरती से बाहर निकाले जाने का समय आ गया है। हमें न केवल घुसपैठियों को बाहर निकालना है, बल्कि एक ऐसी निर्णायक सरकार भी बनानी होगी जो यहां के लोगों को विकास से जोड़ सके।

भाजपा अध्यक्ष नवीन ने आरोप लगाया कि राज्य में कई केंद्रीय योजनाओं का ठीक से क्रियान्वयन नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि जिन योजनाओं को ममता दीदी यहां सौतेले व्यवहार से लागू करती हैं, उन्हें हम यहां हर हाल में लागू करेंगे, चाहे कुछ भी हो जाए। सत्ता में आने से पहले तृणमूल कांग्रेस द्वारा इस्तेमाल किए गए नारे ‘मां, माटी, मानुष’ का हवाला देते हुए, नवीन ने आरोप लगाया कि ‘सोनार बांग्ला’ का वादा पूरा नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा कि ममता दीदी, क्या यही वह सोनार बांग्ला का सपना है जो आपने दिखाया था, जहां केवल भ्रष्टाचार, अराजकता और जनता का शोषण है? जिन युवाओं को आईटी हब देखना था, वे अब असामाजिक गतिविधि देख रहे हैं। जहां विकास होना चाहिए था, वह घोटालों का अड्डा बन गया है। उन्होंने कहा कि ‘परिवर्तन यात्रा’ का उद्देश्य सरकार को जवाबदेह ठहराना है।

नवीन ने सांस्कृतिक और धार्मिक मुद्दों को लेकर भी राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी पर हमला किया। उन्होंने तुष्टीकरण की राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि काली पूजा करने के लिए हमें अदालत से अनुमति लेनी पड़ती है, लेकिन नमाज अदा करने पर ऐसी कोई पाबंदी नहीं है। जब हम पश्चिम बंगाल से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जमीन मांगते हैं, तो ममता कहती हैं कि जमीन उपलब्ध नहीं है और प्रक्रिया में देरी करती हैं।

लेकिन जब तुष्टीकरण की बात आती है, तो वह हर संभव रियायत देने में तत्पर रहती हैं। नवीन ने कहा कि यह ‘परिवर्तन यात्रा’ 5,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करेगी और राज्य के हर घर तक पहुंचेगी।

उन्होंने कहा कि जहां अब तक केवल वादे और अहंकार ही कायम थे, वहां भाजपा बदलाव की आवाज लेकर आ रही है। ये बदलाव केवल व्यवस्था में परिवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिकता में बदलाव लाने से संबंधित हैं। सकारात्मक सोच के साथ हम नए बंगाल की नींव रखेंगे और एक विकसित राज्य का सपना साकार करेंगे। नवीन की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब निर्वाचन आयोग ने एक दिन पहले ही एसआईआर कवायद के बाद मतदाता सूची जारी की थी। पश्चिम बंगाल में कुछ ही महीने में चुनाव होने की संभावना है।

निर्वाचन आयोग द्वारा शनिवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक एसआईआर की प्रक्रिया के बाद 63.66 लाख लोगों के नाम हटाए गए हैं जो कुल मतदाताओं का लगभग 8.3 प्रतिशत है। इससे मतदाताओं की कुल संख्या 7.66 करोड़ से घटकर सिर्फ 7.04 करोड़ के थोड़ा ऊपर रह गई है।

राज्यव्यापी 116 दिवसीय एसआईआर प्रक्रिया 2002 के बाद पहला गहन पुनरीक्षण था। इसमें 60.06 लाख से अधिक मतदाता अब भी विचाराधीन श्रेणी में हैं, जिनकी पात्रता अब आने वाले सप्ताह में न्यायिक समीक्षा के अधीन होगी। मसौदा मतदाता सूची पिछले साल 16 दिसंबर को प्रकाशित हुई थी जिससे मतदाता संख्या पहले ही 7.66 करोड़ से घटकर 7.08 करोड़ हो गई थी।

जहां भाजपा ने इन नामों को हटाने को घुसपैठियों को बाहर निकालने के लिए एक सुधारात्मक कदम बताया है, वहीं राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि इस प्रक्रिया से वास्तविक मतदाताओं के मताधिकार से वंचित होने का खतरा है और उसने भाजपा पर विधानसभा चुनाव से पहले मतदाताओं का ध्रुवीकरण करने का प्रयास करने का आरोप लगाया है।

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