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Namo Bharat Train: अब सौर ऊर्जा से दौड़ेगी नमो भारत ट्रेन! जालौन में 450 करोड़ से लगेगा 110 MW का सोलर प्लांट

Namo Bharat Train: अब सौर ऊर्जा से दौड़ेगी नमो भारत ट्रेन! जालौन में 450 करोड़ से लगेगा 110 MW का सोलर प्लांट

अब सौर ऊर्जा से दौड़ेगी नमो भारत ट्रेन! जालौन में 450 करोड़ से लगेगा 110 MW का सोलर प्लांट

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AAmandeep Singh

Namo Bharat Train: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से मेरठ के बीच चलने वाली देश की पहली क्षेत्रीय त्वरित परिवहन प्रणाली (RRTS) यानी ‘नमो भारत’ ट्रेन अब न केवल लोगों का सफर सुगम बना रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में भी एक नया अध्याय लिखने जा रही है। कॉरिडोर के संचालन के लिए लगने वाली कुल बिजली का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा अब सौर ऊर्जा (सोलर पावर) से पूरा किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में 450 करोड़ रुपये की लागत से 110 मेगावाट (MW) क्षमता का एक विशाल सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की योजना तैयार की गई है।

इस परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) ने एनआइआरएल एनसीआरटीसी रिन्यूएबल्स लिमिटेड (NNRL) के साथ एक पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) पर औपचारिक हस्ताक्षर किए हैं। जालौन स्थित इस संयंत्र के विकास और संचालन की पूरी जिम्मेदारी एनएनआरएल संभालेगी।

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देश के आरआरटीएस और मेट्रो सेक्टर की पहली कैप्टिव सोलर परियोजना

समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के दौरान एनसीआरटीसी के प्रबंध निदेशक शलभ गोयल और एनआइआरएल के निदेशक (वित्त) डॉ. प्रसन्ना कुमार आचार्य समेत दोनों संस्थाओं के कई उच्च अधिकारी मौजूद रहे।

विशेषज्ञों और अधिकारियों के मुताबिक, देश के आरआरटीएस और मेट्रो रेल सेक्टर के इतिहास में यह अपनी तरह की पहली ‘कैप्टिव सौर ऊर्जा परियोजना’ (Captive Solar Project) है। कैप्टिव प्लांट का सीधा मतलब यह होता है कि वहां बनने वाली बिजली का उपयोग किसी बाहरी ग्राहक के बजाय मुख्य रूप से अपनी ही परिचालन जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाता है। जालौन के संयंत्र में उत्पन्न होने वाली बिजली को उत्तर प्रदेश स्टेट ग्रिड के माध्यम से दिल्ली और यूपी में स्थित एनसीआरटीसी के विभिन्न रिसीविंग सब-स्टेशनों तक पहुंचाया जाएगा, जहां से ट्रेन और स्टेशनों को पावर सप्लाई दी जाएगी।

परिचालन लागत में 25% तक की कटौती और हर साल 1.77 लाख टन कम होगा कार्बन उत्सर्जन

वर्तमान में दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर के कुल क्रियान्वयन और परिचालन खर्च (Operational Cost) में अकेले बिजली की हिस्सेदारी लगभग 30 से 35 प्रतिशत बैठती है। जालौन सोलर प्लांट के पूरी क्षमता से चालू होने के बाद बिजली पर होने वाले इस भारी-भरकम खर्च में करीब 25 प्रतिशत तक की बड़ी सीधी बचत होने का अनुमान है।

वित्तीय लाभ के साथ-साथ इस पहल का सीधा और बड़ा फायदा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के पर्यावरण को मिलेगा। इस सौर परियोजना के जरिए हर साल हवा में घुलने वाले लगभग 1.77 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड co2 के उत्सर्जन को रोका जा सकेगा। इसके अलावा, नाइट्रोजन ऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड जैसे बेहद घातक प्रदूषक तत्वों के उत्सर्जन में भी काफी हद तक गिरावट दर्ज की जाएगी, जिससे वायु गुणवत्ता में सुधार होगा।

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