Nangal Chaudhary News: (विजय यादव) दौंखेरा गांव के पहाड़ को खनन लीज पर छोड़ने से गांव में आक्रोश की स्थिति बनी हुई है। ग्रामीणों ने माइंस संचालक से मिलीभगति करके गलत पैमाइश करने तथा अवैध खनन की रिपोर्ट को दबाने के आरोप लगाए हैं।
आक्रोशित लोगों ने पहले पैमाइश करने पहुंचे अधिकारियों से शिकायतकर्ताओं की निगरानी में रिपोर्ट बनाने की गुहार लगाई। सुनवाई नहीं होने पर उन्होंने शाम 3 बजे एसडीएम कार्यालय पर धरना आरंभ कर दिया। मौके पर पहुंची तहसीलदार निशा श्योराण ने पैमाइश में पारदर्शिता तथा ग्रामीणों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आश्वासन दिया। जिससे संतुष्ट ग्रामीण धरने को खत्म करके घरों को रवाना हो गए।
पूर्व सरपंच लालचंद, कालू बटार, महेश कुमार, महावीर ने बताया कि दौंखेरा के पहाड़ को करीब 10 साल पहले लीज पर छोड़ा गया था। उस दौरान संचालक ने विभागीय अधिकारियों से साजबाज होकर पंचायती रकबे पर जमकर खनन किया तथा सरकार को राजस्व का नुकसान पहुंचाया था।
ग्रामीणों के विरोध पर लीज होल्डर को खनन रोकना पड़ा था। लेकिन अब विभाग ने पहाड़ को दुबारा से लीज पर छोड़ने की प्रक्रिया आरंभ कर दी। अनुमति मिलने से पहले ही संचालक ने खनन की गतिविधियां बढ़ा दी और रात के अंधेरे पर मिट्टी खनन करके हजारों छोटे पौधों को नष्ट कर दिया।
ग्रामीणों ने बताया कि करीब दाे साल पहले पहाड़ की तलहटी पर फलदार पौधे लगाए थे, जिनसे पशु-पक्षियों को भोजन मिलना आरंभ हो गया। पहाड़ के हरियाली रकबे पर सैकड़ों युवा शारीरिक अभ्यास करते हैं। किंतु अब खनन प्रक्रिया शुरू होने से पशुओं का चारा तथा ग्रामीणों का शुद्ध वातावरण प्रभावित हो गया।

बीते दिनों खनन शुरू होते ही प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर समाधान की गुहार लगाई थी, लेकिन अभी तक कार्रवाई नहीं हुई। वीरवार की सुबह विभागीय अधिकारियों की टीम पैमाइश करने पहाड़ पहुंची तथा माईंस संचालक को साथ लेकर खनन रकबा मापना आरंभ कर दिया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि माईंस में गांव की तरफ उच्च क्वालिटी का पत्थर है जिसे निकालने के लिए पैमाइश को प्रभावित किया गया है।
जिससे आक्रोशित ग्रामीण एसडीएम कार्यालय में पहुंच गए। यहां एसडीएम नहीं मिलने पर धरने पर बैठ गए तथा प्रशासन विरोधी नारेबाजी आरंभ कर दी। सूचना मिलने पर तहसीलदार निशा श्योराण मौके पर पहुंची तथा ग्रामीणों की समस्या सुनी। उन्होंने पैमाइश रिपोर्ट में पारदर्शिता रखने तथा अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
आवासीय मकानों पर हैवी ब्लास्टिंग के पत्थर गिरेंगे, हादसा संभव
ग्रामीणों ने बताया कि पहाड़ पर रोजाना सैकड़ों पशु चरते हैं, साथ ही 50-60 मकान हैं जहां 400-500 ग्रामीण रहते हैं। हैवी ब्लास्टिंग से उछले हुए पत्थर मकानों पर गिरेंगे जिससे जानलेवा खतरा बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि खनन की डस्ट से गांव में सिलिकोसिस, दमा, एलर्जी व आंखों की बीमारी पनपने का आशंका बनी हुई है।
अवैध खनन की पुष्टि पर सख्त कार्रवाई करेगा प्रशासन
तहसीलदार निशा श्योराण ने बताया कि ग्रामीणों ने माईंस संचालक पर हरे पौधों को उखाड़ने तथा अवैध खनन का आरोप लगाया है। जांच के लिए कमेटी गठित की जाएगी, जिसकी रिपोर्ट में पुष्टि हुई तो संचालक के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने बताया कि खनन के आसपास संभावित हादसे के प्वाइंटों का निरीक्षण करेंगे ताकि ग्रामीणों को जानमाल का खतरा नहीं रहे।
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