September 30, 2026

Narnaul: कांग्रेस के गढ़ में सेंधमारी कर गए अभय चौटाला

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Narnaul: धर्म नारायण शर्मा।
पहले रोहतक और अब मेवात। अभय सिंह चौटाला का टारगेट अब साफ नजर आ रहा है। वे कांग्रेस के गढ़ में सेंधमारी करने का लक्ष्य सामने रखकर अपनी राजनीतिक बिसात बिछा रहे हैं। उनकी प्लानिंग है उस जाट वोट बैंक में अपनी पकड़ मजबूत करना, जो अब भूपेंद्र हुड्डा के हाथ से धीरे धीरे फिसल रहा है।
इंडियन नेशनल लोकदल की नूंह में 27 सितंबर को आयोजित सम्मान रैली में पार्टी के सुप्रीमो अभय सिंह चौटाला ने अपनी ताकत दिखाई। उन्होंने इस मौके पर पार्टी की भविष्य की तस्वीर भी साफ कर दी। पार्टी के अगले चुनावी एजेंडे का ड्राफ्ट भी राजनीतिक पंडितों के सामने रख दिया कि वे प्रदेश के वर्ष 2029 में होने वाले चुनाव से पहले संगठन को मजबूत बनाएंगे।
पार्टी सूत्रों के अनुसार प्लान है कि पहले कांग्रेस के गढ़ को तोड़ना और दूसरा जाट वोट बैंक पर अपनी पकड़ मजबूत करना। फिर इसके बूते विधानसभा चुनाव में सत्ता को अपने हाथ में लाना।
हालांकि भारतीय जनता पार्टी जिस तरीके से गैर जाट वोट का ध्रुवीकरण किए हुए हैं, उसे देखते हुए अकेले जाट वोटो के सहारे सरकार बनाने या सत्ता के सिंहासन पर जा बैठने का सपना सहज में पूरा होना संभव नहीं दिखता।

लेकिन अभय सिंह चौटाला की मंशा अगली बार सरकार बनाने वाले दल के साथ बेहतर गठबंधन करने या सत्ता में भागीदारी की संभावनाएं पैदा करने की है।
बता दें कि इन दिनों प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य में नजर आ रहा है कि पिछले कुछ समय से जाट वोट भूपेंद्र हुड्डा से खिसक रहे हैं।

देखा जाए तो भूपेंद्र हुड्डा केवल जाट वोटो के भरोसे हरियाणा में अब तक सरकार नहीं बना पाए हैं। वर्ग 2024 के चुनाव में जब कांग्रेस और भूपेंद्र हुड्डा दोनों सरकार बनाने के करीब थे, तब सत्ता उनके हाथ में आने से पहले ही फिसल गई। इस बात का उनके समर्थको, ख़ासकर जाटों में गहरा रोष है। चर्चा है कि जाट समुदाय दूसरे विकल्प भी तलाश रहे है। इससे अभय चौटाला का काम और आसान हो जाएगा।
अगर हम वर्ष 2005 के चुनाव की बात करें तब भजन लाल प्रदेश अध्यक्ष थे। कांग्रेस ने 67 सीटें जीती। तब हुड्डा ने चुनाव नहीं लड़ा था। वह एमपी थे। मुख्यमंत्री बनने के बाद विधानसभा ही पहुंचे।
इसी प्रकार वर्ष 2009 में भी कांग्रेस अपने दम पर सरकार नहीं बना पाई। तब भूपेंद्र हुड्डा ने हजकां को तोड़कर सरकार बनाई।
वर्ष 2014 की बात करें तो हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस तीसरे नंबर की पार्टी बनकर रह गई। वर्ष 2019 में पार्टी बुरी तरह हारी। यहां जेजेपी 10 सीटों के साथ गठबंधन का हिस्सा बन गई।
वर्ष 2024 में एक बार फिर प्रदेश में कांग्रेस राज आने का माहौल बना। तभी भूपेंद्र हुड्डा के नेतृत्व वाली कांग्रेस पार्टी सरकार बनने से चूक गई।
जीतती कांग्रेस अचानक चुनावी लड़ाई क्यों हार गई, इसी बात को अभय सिंह चौटाला ने नूंह रैली में स्पष्ट कर भी दिया। उन्होंने कहा की भूपेंद्र हुड्डा ने अमित शाह के इशारे पर ईडी और जेल जाने के डर से भयभीत होकर खेल खेला। उन्होंने राहुल गांधी को सभी सिटिंग एमएलए को टिकट दिलाने के लिए मना लिया। इससे जीतने वाले उम्मीदवारों की टिकट काट दी गई। ऐसे में कांग्रेस बीजेपी की भी टीम बनाकर रह गई। प्रदेश में भाजपा सरकार तीसरी बार बनवाने में भूपेंद्र सिंह हुड्डा का ही सहयोग रहा।
अब अगर हम बात करें जाट वोट बैंक की तो इनेलो सुप्रीमो अभय सिंह चौटाला का एक टारगेट दिखता है। वह है जाटों में अपनी पकड़ मजबूत करना।

उन्होंने पिछली बार रोहतक में ऐसी रैली आयोजित की। वह कांग्रेस का गढ़ था। वहां बेहतर तरीके से सफल रैली करके इस बार उन्होंने मेवात को चुना। यह भी कांग्रेस का गढ़ है। रोहतक और मेवात में भाजपा की स्थिति बहुत कमजोर है। इनेलो की मजबूती इसका सीधा नुकसान कांग्रेस को होने जा रहा है। फायदा अगर मिलेगा तो बीजेपी को मिलेगा। क्योंकि बीजेपी की अभी जाटों में मजबूत पकड़ नहीं बन पाई है।

हां उसने कुछ हद तक जाट वोट बैंक में सेंधमारी के प्रयास जरूर किए है, लेकिन जाटलैंड में भी वह गैर जाटों के दम पर सरकार बनाने में सफल रही।
यहां बता दें कि हरियाणा में जाटों की राजनीति सबसे पहले चौधरी देवीलाल ने शुरू की। उसके बाद ओमप्रकाश चौटाला ने इन्हें पूरी तरह से लामबंद किया। मनोहर लाल खट्टर राज में वर्ष 2016 के जब दंगे हुए तो जाटों का एक बड़ा धड़ा भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पक्ष में हो गया।

हालांकि तब भूपेंद्र हुड्डा ने जाट समुदाय का नाम दिए बिना इन्हें किसान वोट कहकर अपने पक्ष में करने का प्रयास किया था। वर्ष 2019 में जींद, फतेहाबाद हिसार में जजपा जाट वोट बैंक को अपने साथ लाने में सफल रही। तब इंडियन नेशनल लोकदल का वोट बैंक मात्र एक प्रतिशत रह गया।
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद जाट फिर से कांग्रेस की तरफ हो गए और बीजेपी भगाओ हुड्डा लाओ का नारा भी प्रदेश में चला। लेकिन भूपेंद्र हुड्डा इस कांग्रेस के पक्ष में कैश करने में नाकाम रहे। अब अभय सिंह चौटाला ने इसी जाट वोट बैंक को लक्ष्य में रखकर प्लानिंग शुरू कर दी है। जिस तरीके से उन्होंने रोहतक के बाद अब नूंह में पार्टी का सफल कार्यक्रम किया, उससे लगता है कि वह अपने मंसूबों में धीरे-धीरे कामयाब हो जाएंगे।

 

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