Narnaul: नारनौल शहर में अब तक पेयजल के 465 तथा सीवर के 1001 कनेक्शन वैध किए जा चुके हैं। शहर में अभी भी लगभग 15 हजार से अधिक कनेक्शन अवैध हैं, जिन्हें वैध किया जाना है। विभाग की टीमें लगातार घर-घर जाकर उपभोक्ताओं को जागरूक कर रही हैं।
उपमंडल अभियंता मुकेश कुमार ने बताया कि विभाग द्वारा वर्तमान में बिना किसी शुल्क के पेयजल एवं सीवर कनेक्शन वैध किए जा रहे हैं। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा नारनौल शहर में पेयजल एवं सीवर कनेक्शनों को वैध करवाने के लिए विशेष घर-घर जागरूकता एवं कनेक्शन वैधीकरण अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत विभाग की टीमें शहर के विभिन्न मोहल्लों में पहुंचकर उपभोक्ताओं को कनेक्शन वैध करवाने के लिए जागरूक कर रही हैं तथा मौके पर ही आवश्यक दस्तावेज लेकर फाइल तैयार की जा रही है।
उपमंडल अभियंता ने कहा कि सरकार एवं प्रशासन का उद्देश्य शहरी उपभोक्ताओं को पेयजल एवं सीवर की बेहतर और व्यवस्थित सुविधाएं उपलब्ध करवाना है। इसके लिए प्रत्येक कनेक्शन का वैध होना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से विभाग द्वारा यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जो उपभोक्ता अपने पेयजल एवं सीवर कनेक्शन को वैध नहीं करवाएंगे, उनके कनेक्शन काटने की कार्रवाई भी विभाग द्वारा अभियान के साथ-साथ की जा रही है। इसके अतिरिक्त, पेयजल की बर्बादी करते पाए जाने वाले उपभोक्ताओं को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इस मौक़े पर बिल ब्रांच से दीपक सांडिल्य व उनकी टीम भी साथ रही।
जिले के शहरी क्षेत्रों में भी अभियान जारी
जिला सलाहकार मंगतू राम सरस्वा ने बताया कि जिला महेंद्रगढ़ के सभी प्रमुख शहरी क्षेत्रों में पेयजल एवं सीवर कनेक्शन वैधीकरण का अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अब तक अटेली शहर में पेयजल के 98 तथा सीवर के 291 कनेक्शन वैध किए गए।
कनीना शहर में पेयजल के 126 तथा सीवर के 411 कनेक्शन वैध किए गए। महेंद्रगढ़ शहर में पेयजल के 289 तथा सीवर के 1240 कनेक्शन वैध किए गए।
नांगल चौधरी शहर में पेयजल के 443 तथा सीवर के 968 कनेक्शन वैध किए गए।
नारनौल शहर में पेयजल के 465 तथा सीवर के 1001 कनेक्शन वैध किए गए।
जिला सलाहकार ने बताया कि विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में भी पेयजल की बर्बादी रोकने के लिए जागरूकता एवं जल अर्पण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की कि पानी की प्रत्येक बूंद कीमती है, इसलिए पेयजल कनेक्शन पर टूंटी का अनिवार्य रूप से इस्तेमाल करें और पानी को व्यर्थ न बहने दें।
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