Narnaul News Update: नांगल चौधरी क्षेत्र के गांव दौखेरा में संचालित होने वाली माइंस के खिलाफ सोमवार को ग्रामीणों का गुस्सा सड़क पर आ गया। बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने लघु सचिवालय पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया और खनन कार्य में नियमों की जमकर अनदेखी करने तथा कृषि योग्य भूमि को भारी नुकसान पहुंचाने का गंभीर आरोप लगाया।
प्रदर्शन के बाद ग्रामीणों ने उपायुक्त (डीसी) को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
रिहायशी क्षेत्र के पास कृषि योग्य पंचायती जमीन को समतल करने का आरोप
ग्रामीणों ने ज्ञापन में मुख्य रूप से आरोप लगाया कि गांव दौखेरा में खनन कार्य शुरू होना है, लेकिन इसके शुरू होने से पहले ही वहां रिहायशी क्षेत्र के नजदीक स्थित कृषि योग्य पंचायती जमीन को गैर-कानूनी तरीके से समतल किया जा रहा है। इस दौरान खनन और प्रशासनिक नियमों का बिल्कुल भी पालन नहीं किया जा रहा है, जिससे आसपास की उपजाऊ कृषि भूमि और ग्रामीणों के हित सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं।
प्रशासन और माइंस संचालकों पर मिलीभगत का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इस गंभीर मुद्दे को लेकर वे पहले भी संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपनी शिकायतें रख चुके हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का कोई समाधान नहीं निकला। उन्होंने बताया कि पहले यहां ‘जेडी माइंस’ चलती थी, जिसके खिलाफ ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री (सीएम) से मुलाकात की थी। इसके बाद वहां खनन कार्य बंद करा दिया गया था, लेकिन अब कथित तौर पर प्रशासन की मिलीभगत से वहां दोबारा से दूसरे नाम के तहत खनन की अनुमति दे दी गई है।
किसानों की भूमि को नुकसान और सीमाओं की जांच की मांग
प्रदर्शन में शामिल ग्रामीण हनुमान, महावीर, लालचंद, सुंदर, हीरालाल, सुरेश, लीलाराम, पप्पू, कृष्ण व सुभाष ने आरोप लगाया कि खनन क्षेत्र में उपजाऊ जमीन पर भी गतिविधियां चलाई जा रही हैं। इससे गांव के किसानों और स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि खनन क्षेत्र की सीमाओं, खनिज की उपलब्धता और कई फीट तक की गई गहरी खुदाई की गहराई की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। इसके अलावा, पर्यावरण संबंधी नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी भी पड़ताल की मांग उठाई गई।
विशेष जांच टीम भेजकर कार्रवाई की गुहार
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि खनन क्षेत्र की पैमाइश (माप) कराई जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि निर्धारित सीमा से बाहर खनन तो नहीं हो रहा है। साथ ही, खनन से निकलने वाली मिट्टी व अन्य सामग्री के निस्तारण और सुरक्षा व्यवस्था की जांच के लिए मौके पर एक विशेष टीम भेजी जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो उनका आंदोलन और तेज होगा।
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