Narnaul : नारनौल के समीप दुलोठ ग्राम में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के सप्तम दिवस पर सर्वप्रथम मनीष शास्त्री ने मुख्य यजमान सुरेश कुमार, प्रवीण कुमार एवं परिवार के द्वारा विधि-विधान से सभी देवताओं का पूजन करवाया और भागवत कथा का शुभारंभ करवाया।
इसके उपरांत आचार्य बजरंग शास्त्री जी ने भागवत कथा का प्रवचन देते हुये बताया कि भगवान भक्तों के भाव को देखते है, भाव के बिना वो किसी भी वस्तु को ग्रहण नही करते। भगवान कहते है की भाव का भूखा हूँ मैं और भाव ही एक सार है, भाव से मुझको भजे तो भव से बेड़ा पार है।
आचार्य जी ने गोपी उद्धव सम्वाद का मार्मिक वर्णन करते हुये कहा कि गोपीयों का प्रेम संसारिक प्रेम नही था, ये तो भक्त और भगवान का प्रेम था।उन्होने बताया कि भगवान को नि:स्वार्थ भक्ति पसंद है। जो भक्त भक्त नि:स्वार्थ भक्ति करता है, भगवान उस पर स्वयं न्यौछावर हो जाते है, क्योंकि भगवान कहते है “निर्मल मन जन सो मोहि पावा मोहि कपट छल छिद्र ना भावा”।
आचार्य जी ने कहा कि हमे धर्म कर्म मे रुचि लेकर भगवान का सुमिरन करते रहना चाहिये। हमारे अच्छे कर्म और भगवान का नाम ही हमे मुसीबतों से बचाता है। व्यास जी ने कृष्ण सुदामा चरित्र का बड़ा ही मार्मिक वर्णन करते हुये कहा कि “देख सुदामा की दीन दशा, करुणा करके करुणानिधि रोये। पानी परात को हाथ छुयो नही नैनन के जल सो पग धोये “, सुनकर सभी भक्तो के नेत्र सजल हो गये।
उन्होने बताया की सुदामा के लिये जितने विशेषण भागवत मे बताएं गये है, शायद ही किसी के लिये उनका प्रयोग किया गया हो। सुदामा जी एक तपोनिष्ठ और ब्रह्म को जानने वाले ब्राह्मण थे।उन्होने बताया कि जैसी मित्रता कृष्ण और सुदामा जी ने निभाई वैसी ही हमे भी मित्रता निभानी चाहिये।
अंत मे दत्तात्रेय के चौबीस गुरुओं की कथा और कलियुग के प्रभाव का वर्णन किया, उन्होने बताया कि कलियुग मे बहुत अत्याचार होगा, संतों ब्राह्मणो का अपमान होगा माता पिता का तिरस्कार होगा। कलियुग मे सभी पापों से बचने का एकमात्र उपाय हरी नाम सँकिर्तन है। इसलिए हमे सदा भगवान के नाम का स्मरण करते रहना चाहिये। उसके बाद भागवत जी की और शुकदेव जी की विदाई की गई।
कथा के अंत मे वृंदावन की प्रसिद्ध फूलों की होली खेली गयी, जिसमे सुंदर झांकी भी दिखाई गयी, जिसमें सभी भक्तो ने झुमकर नाच कर आनँद लिया। इस अवसर मुख्य रूप से राकेश कुमार, सुरेश कुमार, महिपाल सिंह, प्रवीण, अशोक, सुदेश छक्कड, अनिल कुमार एवं किन्जा परिवार सहित सैकडों की संख्या अनेक गणमान्य लोग मुख्य रूप से उपस्थित थे।
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