October 3, 2026

Narnaul: विद्यार्थियों को डिजिटल अरेस्ट, ओटीपी ठगी और वॉइस क्लोनिंग से बचाव के प्रति किया जागरूक

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Narnaul:  साइबर थाना नारनौल की टीम ने आज सी.एल. पब्लिक स्कूल, नारनौल में साइबर अपराध जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। अक्टूबर माह को राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा जागरूकता माह के रूप में मनाए जाने के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को साइबर अपराधियों के बदलते तरीकों, ऑनलाइन ठगी की पहचान तथा सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के बारे में जानकारी दी गई।

हरियाणा पुलिस के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूरे अक्टूबर माह जिले के विभिन्न स्कूलों एवं शिक्षण संस्थानों में साइबर सुरक्षा संबंधी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अभियान की थीम “STOP-THINK-TAKE ACTION” के माध्यम से विद्यार्थियों को संदेश दिया गया कि किसी भी ऑनलाइन संदेश, कॉल या आकर्षक प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देने से पहले रुकें, सोचें और उसकी सत्यता परखकर कदम उठाएं।
कार्यक्रम में साइबर थाना नारनौल की टीम ने विद्यार्थियों को बताया कि साइबर अपराधी पुलिस अथवा जांच एजेंसियों के अधिकारी बनकर फोन और वीडियो कॉल के जरिए डर पैदा करते हैं। किसी मामले में फंसाने या गिरफ्तारी की धमकी देकर पैसे मांगना ठगी का संकेत है। ऐसे तथाकथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ के दबाव में आकर पैसे न भेजें और तुरंत अपने अभिभावकों तथा पुलिस को जानकारी दें।
टीम ने ओटीपी, पासवर्ड, यूपीआई पिन और बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करने की हिदायत दी। विद्यार्थियों को समझाया गया कि इनाम, छात्रवृत्ति, मुफ्त रिचार्ज, ऑनलाइन गेमिंग पुरस्कार अथवा कमाई के आकर्षक प्रस्तावों के जरिए भेजे गए संदिग्ध लिंक से सावधान रहें। अनजान स्रोत से ऐप डाउनलोड करने और मोबाइल स्क्रीन साझा करने से भी निजी एवं वित्तीय जानकारी के दुरुपयोग का खतरा हो सकता है।
वॉइस क्लोनिंग के बारे में जानकारी देते हुए टीम ने बताया कि तकनीक की मदद से परिचित व्यक्ति जैसी आवाज बनाकर दुर्घटना, बीमारी या अन्य आपात स्थिति का बहाना बनाते हुए पैसे मांगे जा सकते हैं। ऐसी कॉल आने पर घबराकर भुगतान करने के बजाय संबंधित व्यक्ति के पहले से उपलब्ध नंबर पर स्वयं संपर्क कर पुष्टि करें।
विद्यार्थियों को सोशल मीडिया पर सुरक्षित व्यवहार, साइबर बुलिंग और फर्जी प्रोफाइल से बचाव के बारे में भी जागरूक किया गया। उन्हें अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करने, अपनी लोकेशन व व्यक्तिगत तस्वीरें सार्वजनिक करने से बचने तथा मजबूत पासवर्ड और दो-स्तरीय सुरक्षा अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। किसी के धमकाने, अनुचित संदेश भेजने या निजी तस्वीर मांगने पर बात छिपाने के बजाय अभिभावक अथवा शिक्षक को बताने और संबंधित चैट व स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में वित्तीय साइबर धोखाधड़ी होने पर तत्काल हेल्पलाइन 1930 पर सूचना देने तथा www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराने के बारे में बताया गया। विद्यार्थियों को यह भी समझाया गया कि समय पर सूचना और लेनदेन संबंधी विवरण उपलब्ध कराना कार्रवाई में महत्वपूर्ण होता है।
जिला पुलिस महेंद्रगढ़ ने अभिभावकों और शिक्षकों से अपील की कि वे बच्चों के साथ ऑनलाइन गतिविधियों को लेकर नियमित संवाद रखें और ऐसा भरोसेमंद वातावरण बनाएं, जिसमें बच्चे किसी भी परेशानी की जानकारी बिना डर के दे सकें। विद्यार्थियों से भी कार्यक्रम में मिली जानकारी अपने परिवार और परिचितों तक पहुंचाने का आह्वान किया गया, ताकि साइबर सुरक्षा का संदेश स्कूल से घर-घर तक पहुंचे।

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