Navratri Day 6: शक्ति और उपासना के महापर्व शारदीय नवरात्रि के छठे दिन आज मंदिरों और घरों में मां कात्यायनी के जयकारे गूंज रहे हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार, आज 16 अक्टूबर 2026 को नवरात्रि का छठा दिन है। इन नौ दिनों में माता रानी के अलग-अलग नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है, जिनमें छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा का विधान है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, महर्षि कात्यायन ने भगवती को अपनी पुत्री के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी, जिसके फलस्वरूप माता ने उनके यहां पुत्री रूप में जन्म लिया और वे मां कात्यायनी कहलाईं।
ऐसा है माता कात्यायनी का अलौकिक स्वरूप
शास्त्रों में मां कात्यायनी के स्वरूप को बेहद तेजस्वी और भव्य बताया गया है। सिंह पर सवार माता की चार भुजाएं हैं। उनके एक बाएं हाथ में तलवार और दूसरे बाएं हाथ में कमल का फूल सुशोभित रहता है, जबकि उनके दोनों दाहिने हाथ क्रमशः अभय और वरद मुद्रा में भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। लाल रंग की प्रियता और अपने भक्तों के संकटों को पलभर में दूर करने वाली मां कात्यायनी को ब्रह्मांड की रक्षक के रूप में पूजा जाता है।
पूजा के शुभ मुहूर्त और विधि
आज के दिन जो श्रद्धालु मां कात्यायनी की आराधना कर रहे हैं, उनके लिए कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। सुबह के वक्त ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:42 से 5:32 बजे तक) और प्रातः संध्या के बाद, दिन में अभिजीत मुहूर्त (सुबह 11:43 से दोपहर 12:29 बजे तक) पूजा के लिए अत्यंत उत्तम रहेगा। इसके अलावा शाम के समय गोधूलि मुहूर्त (शाम 5:51 से 6:16 बजे तक) में भी माता की आराधना की जा सकती है।
पूजा की शुरुआत स्नान आदि से निवृत्त होकर लाल या पीले वस्त्र धारण करने के साथ होती है। मंदिर को गंगाजल से पवित्र कर मां कात्यायनी की तस्वीर या मूर्ति स्थापित की जाती है। माता को रोली, अक्षत, श्रृंगार का सामान, लाल फूल और विशेष रूप से गुलाब के फूल अर्पित किए जाते हैं।
मां कात्यायनी को प्रिय भोग और मंत्र
माता को प्रसन्न करने के लिए आज के दिन भोग में शहद और फल के रूप में केला अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान ‘ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥’ मंत्र का जाप करते हुए घी का दीपक जलाएं और अंत में मां की आरती और व्रत कथा का पाठ करें। शाम के समय दोबारा पूजा-अर्चना के बाद व्रती अपना उपवास खोल सकते हैं।
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