Navratri Puja Vidhi: शारदीय हो या चैत्र, नवरात्रि के नौ दिन मां भगवती की उपासना और साधना के लिए बेहद पवित्र माने जाते हैं। इन नौ दिनों में भक्त अपने घरों में घटस्थापना करते हैं और नौ दिनों तक मां के सम्मुख अखंड ज्योति प्रज्वलित रखते हैं। धार्मिक मान्यताओं में अखंड ज्योति को साक्षात शक्ति, सकारात्मकता और अखंड भक्ति का प्रतीक माना गया है। हालांकि, केवल दीपक जला देना ही काफी नहीं है; वास्तु शास्त्र में अखंड ज्योति की स्थापना को लेकर कुछ बेहद स्पष्ट नियम बताए गए हैं। सही दिशा और सही विधि से जलाई गई ज्योति घर से नकारात्मक शक्तियों को खत्म कर सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है।
आग्नेय कोण में रखें अखंड दीपक: जानिए क्यों खास है यह दिशा
वास्तु सिद्धांतों के अनुसार, घर या पूजा कक्ष का दक्षिण-पूर्व कोना अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। यही वजह है कि अखंड ज्योति स्थापित करने के लिए इस दिशा को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। यदि आपके घर में अलग से पूजा घर बना हुआ है, तो मंदिर के दक्षिण-पूर्व हिस्से में ज्योति स्थापित करें। ध्यान रहे कि स्थान ऐसा हो जो पूरी तरह सुरक्षित हो और जहां नित्य पूजा-पाठ करने में किसी तरह की बाधा न आए। यदि जगह सीमित हो, तो सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए किसी स्थिर स्थान का चयन करें।
किस तरफ होना चाहिए दीपक की लौ का रुख?
दीपक रखने की दिशा के साथ-साथ उसकी लौ का रुख किस तरफ है, इसका भी बड़ा धार्मिक महत्व है। वास्तु के अनुसार, अखंड ज्योति की लौ का रुख हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ होना चाहिए। पूर्व दिशा को नव-ऊर्जा, आरोग्य और आत्म-विकास से जोड़कर देखा जाता है, जबकि उत्तर दिशा को धन-धान्य और कुबेर की दिशा माना जाता है। पश्चिम या दक्षिण दिशा की तरफ लौ का रुख रखना वास्तु के लिहाज से शुभ नहीं माना जाता, इसलिए दीपक की बनावट का ध्यान रखते हुए ही उसे स्थापित करें।
जमीन पर न रखें दीपक: चावल या गेहूं का दें आधार
अखंड ज्योति को कभी भी सीधे फर्श या जमीन पर नहीं रखना चाहिए। शास्त्रगत मान्यताओं के अनुसार, दीपक के नीचे कोई पवित्र धातु की थाली, स्टैंड या फिर चावल व गेहूं की ढेरी जरूर लगानी चाहिए। इससे अग्नि देव और मां दुर्गा का सम्मान बना रहता है। इसके अलावा, इस बात का भी विशेष ध्यान रखें कि जिस आधार पर दीपक रखा जा रहा है, वह पूरी तरह समतल और अग्निरोधक हो, ताकि किसी भी तरह के हादसे का अंदेशा न रहे।
माता की चौकी और अखंड ज्योति का सही संतुलन
पूजा के लिए घर का उत्तर-पूर्व दिशा सबसे पवित्र माना जाता है। यही कारण है कि अधिकतर घरों में माता रानी की चौकी इसी दिशा में सजाई जाती है। यदि आपने उत्तर-पूर्व दिशा में माता की चौकी स्थापित की है, तो अखंड ज्योति को उसी पूजा स्थल के दक्षिण-पूर्व वाले हिस्से में रखें। ऐसा करने से पूजा स्थल में वास्तु का सही संतुलन बना रहता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
सुरक्षा से न करें समझौता: इन बातों का रखें खास ख्याल
अखंड ज्योति नौ दिनों तक लगातार जलती है, इसलिए श्रद्धा के साथ-साथ सतर्कता भी बेहद जरूरी है।
ज्वलनशील चीजों से दूरी: दीपक को पर्दे, किताबों, कपड़ों या लकड़ी के सामान से सुरक्षित दूरी पर रखें।
हवा से बचाव: तेज पंखे या खिड़की से आने वाली हवा से बचाने के लिए चिमनी या कांच के सुरक्षा घेरे का इस्तेमाल करें, लेकिन ध्यान रखें कि ऑक्सीजन का प्रवाह न रुके।
तेल-घी का ध्यान: दीपक में तेल या घी डालते समय सावधानी बरतें और लौ को बुझने न दें। बत्ती को आगे बढ़ाते समय चिमटी का प्रयोग करें।
बच्चों की पहुंच से दूर: ज्योति को ऐसी जगह स्थापित करें जहां बच्चे या पालतू जानवर न पहुंच सकें।
डिस्क्लेमर: ‘जग मार्ग’ में दी गई वास्तु व धार्मिक जानकारियां मान्यताओं और लोक परंपराओं पर आधारित हैं। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अखंड ज्योति की स्थापना व पूजा के नियमों में भिन्नता हो सकती है। पाठक अपने परिवार की परंपरा और मान्यताओं का पालन करें। किसी भी विशेष निर्णय या निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित विषय के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।
यह भी पढ़ें– नवरात्रि पूजा सामग्री कलश स्थापना से लेकर अखंड ज्योति तक, नोट करें हर जरूरी सामान

