Navratri Puja Samagri List: शारदीय हो या चैत्र, नवरात्रि का पावन पर्व आते ही हर घर में भक्ति और उल्लास का माहौल बन जाता है। मां दुर्गा के नौ रूपों की उपासना के लिए विधि-विधान के साथ तैयारियां शुरू कर दी जाती हैं।
पूजा के दौरान किसी छोटी-मोटी वस्तु की कमी के कारण ध्यान भंग न हो, इसके लिए पूजा सामग्री की पूर्व तैयारी बेहद जरूरी है। रोली, अक्षत, चुनरी, दीपक और भोग जैसी दैनिक पूजा की वस्तुओं से लेकर कलश स्थापना और कन्या पूजन तक की सामग्री को अगर समय रहते व्यवस्थित कर लिया जाए, तो पूरी पूजा भक्तिभाव और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होती है।
दैनिक पूजा एवं माता के आसन की मुख्य सामग्री
नवरात्रि में मां दुर्गा (Durga Puja Preparation) की रोज की पूजा के लिए माता की चौकी सजाने से लेकर आरती तक कई छोटी-बड़ी चीजों की आवश्यकता होती है। रोली, अक्षत और कलावा ((Kalash Sthapana Samagri)) जैसी सूक्ष्म वस्तुओं को अलग-अलग डिब्बियों में सजाकर रखना सुविधा जनक रहता है।
पूजा सामग्री उपयोग एवं महत्व
मां दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा पूजा स्थान (चौकी) पर स्थापित करने हेतु
साफ चौकी एवं लाल कपड़ा माता रानी का भव्य आसन तैयार करने के लिए
लाल चुनरी एवं श्रृंगार सामान देवी भगवती को अर्पित करने हेतु
रोली/कुमकुम, अक्षत, कलावा तिलक, संकल्प पूजन विधि के लिए
फूल, पुष्पमाला एवं आम के पत्ते माता के श्रृंगार और कलश सजावट के लिए
दीपक, रुई की बाती, घी या तेल नित्य आरती एवं दीप प्रज्वलन के लिए
धूप, अगरबत्ती, कपूर व फल-मिठाई वातावरण शुद्धिकरण एवं भोग अर्पण हेतु
गंगाजल, शुद्ध जल, लोटा व थाली आचमन, अर्घ्य और सामग्री व्यवस्थित रखने के लिए
कलश स्थापना और जौ बोने की विशेष तैयारी
नवरात्रि के प्रथम दिन घटस्थापना (कलश स्थापना) करने वाले परिवारों को दैनिक पूजा की सामग्री के अलावा कुछ विशेष वस्तुएं एकत्र करनी होती हैं। (Navratri Akhand Jyoti Rules) कलश के लिए तांबे, पीतल या मिट्टी का पात्र, शुद्ध जल, गंगाजल, जटा वाला साबुत नारियल, लाल कपड़ा, मौली, सुपारी, सिक्का और अक्षत की आवश्यकता पड़ती है। इसके अलावा, यदि आपके घर में जौ बोने की परंपरा है, तो मिट्टी का चौड़ा पात्र (सकोरा), साफ मिट्टी और जौ के बीज पहले से लाकर रख लें। ध्यान रहे कि जौ के पात्र में हल्की नमी बनी रहे, अत्यधिक पानी डालने से बीज खराब हो सकते हैं।
अखंड ज्योति प्रज्वलन में बरतें सुरक्षा और सावधानी
यदि आपके घर में पूरे नौ दिनों तक अखंड ज्योति प्रज्वलित करने का संकल्प लिया जाता है, तो इसके लिए मजबूत आधार वाला दीपक, पर्याप्त मात्रा में घी या तेल और अतिरिक्त रुई की बातियों का इंतजाम पहले से रखें। सुरक्षा की दृष्टि से अखंड दीप को चुनरी, पर्दे, कागज या किसी भी ज्वलनशील वस्तु से सुरक्षित दूरी पर स्थापित करें।
घर में छोटे बच्चे या पालतू जानवर हों, तो दीपक को उनकी पहुंच से दूर रखें। (Jau Sowing Navratri Method) यदि किसी कारणवश अखंड ज्योति की सतत देखरेख संभव न हो, तो कुल परंपरा के अनुसार सुबह-शाम दीपक जलाकर भी विधि-विधान से मां भगवती की उपासना की जा सकती है।
यह भी पढ़ें–Krishna Kalki Dwadashi Vrat: जानिए कैसे एक व्रत से राजा विशाल को वापस मिला खोया हुआ राजवैभव

