Yamunanagar News: यमुनानगर समाचार: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश सपरा ने किया नमनYamunanagar News: यमुनानगर समाचार: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश सपरा ने किया नमन

Yamunanagar News: (संजीव चौहान) देश की एकता, अखंडता और वैचारिक चेतना के अग्रदूत डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर आज यमुनानगर जिले में राष्ट्रभक्ति का अनूठा ज्वार देखने को मिला। भाजपा जिला कार्यालय ‘यमुना कमल’ में आयोजित मुख्य समारोह सहित जिले के लगभग हर बूथ पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने इस महान स्वतंत्रता सेनानी और जनसंघ के संस्थापक को कोटि-कोटि नमन किया।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश सपरा ने डॉ. मुखर्जी के तैलचित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस दौरान सपरा ने कहा, “डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी केवल एक राजनीतिक दल के संस्थापक नहीं थे, बल्कि वे स्वतंत्र भारत की संप्रभुता के सबसे मजबूत स्तंभ थे। कश्मीर को भारत का मुकुट बनाए रखने के लिए उन्होंने जो सर्वोच्च बलिदान दिया, उसे यह कृतज्ञ राष्ट्र कभी नहीं भुला सकता। आज देश का हर नागरिक उनके दिखाए मार्ग पर चलकर भारत को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प दोहरा रहा है।”

मात्र 33 वर्ष की उम्र में कुलपति और देश के पहले उद्योग मंत्री

श्रद्धांजलि सभा के दौरान डॉ. मुखर्जी के बहुआयामी व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए भाजपा जिला महामंत्री प्रवीण खदरी ने उनके जीवन के कुछ प्रेरक प्रसंग साझा किए। उन्होंने बताया कि 6 जुलाई 1901 को जन्मे डॉ. मुखर्जी अद्वितीय प्रतिभा के धनी थे। वे महज 33 वर्ष की आयु में कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बने थे। आजादी के बाद जब देश का पहला मंत्रिमंडल बना, तो उन्हें उद्योग और आपूर्ति मंत्रालय की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई। खदरी ने आगे कहा कि देश के आधुनिक औद्योगिक विकास की नींव रखने वाले डॉ. मुखर्जी के लिए पद से बड़े उनके सिद्धांत थे। यही वजह थी कि जब देश की आंतरिक नीतियों और अखंडता से समझौता होने लगा, तो उन्होंने बिना एक पल गंवाए केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।

कश्मीर की जेल में रहस्यमयी मौत और वो ऐतिहासिक नारा

जिला महामंत्री नरेंद्र सिंह राणा और जिला मीडिया प्रमुख कपिल मनीष गर्ग ने डॉ. मुखर्जी के कश्मीर आंदोलन के ऐतिहासिक घटनाक्रम को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि उस दौर में कश्मीर जाने के लिए अलग से परमिट की व्यवस्था थी और वहां का अपना अलग झंडा और संविधान था। इसके विरोध में डॉ. मुखर्जी ने “एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे” का गगनभेदी नारा दिया।

मीडिया प्रमुख कपिल मनीष गर्ग ने अपने छछरौली स्थित कार्यालय और बूथ नंबर 100 पर कार्यकर्ताओं के साथ पुष्पांजलि अर्पित करते हुए बताया कि देश को एक सूत्र में पिरोने के लिए डॉ. मुखर्जी बिना परमिट के ही कश्मीर सीमा में दाखिल हो गए थे। जहां 11 मई 1953 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और नजरबंदी के दौरान ही 23 जून 1953 को रहस्यमयी परिस्थितियों में उनका निधन हो गया। इतिहास में उनका यही महाप्रयाण ‘बलिदान दिवस’ के रूप में अमर हो गया।

अनुच्छेद 370 का खात्मा ही सच्ची श्रद्धांजलि

इस मौके पर अपने बूथ पर आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे सीएम विंडो एमीनेंट पर्सन कल्याण सिंह ने भी विचार रखे। उन्होंने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक दूरदर्शी राजनेता, महान शिक्षाविद और मानवतावादी नेता थे। आज केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को मटियामेट करना और पूरे देश को तिरंगे के एक निशान के नीचे लाना डॉ. मुखर्जी के उसी अधूरे सपने की वास्तविक पूर्णता है, जिसके लिए उन्होंने कश्मीर की जेल में अपने प्राणों की आहुति दे दी थी।

By Jagmarg