Uttarakhand News: उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू स्थित गुरुद्वारा साहिब में पिछले चार दिनों से चल रहा विवाद मंगलवार को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझ गया। गुरुद्वारे में डटे चार निहंग, पंजाब से पहुंचे सिख जत्थे के साथ बातचीत के बाद वापस लौट गए। इसके साथ ही गुरुद्वारे की व्यवस्था दोबारा संचालक बाबा बेअंत सिंह को सौंप दी गई। निहंगों ने कहा कि उत्तराखंड सरकार, प्रशासन, पुलिस और धार्मिक नेताओं के सहयोग से समाधान निकाला गया है तथा हेमकुंड साहिब यात्रा पहले की तरह सुचारु रूप से जारी रहेगी।
कार्रवाई नहीं करने की शर्त पर बने सहमति के हालात
निहंगों ने बताया कि उन्होंने उत्तराखंड सरकार के सामने अपने साथियों पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं करने की शर्त रखी थी। प्रशासन की ओर से इस मांग पर सहमति बनने के बाद गुरुद्वारे की तीसरी मंजिल पर मौजूद उनके साथी नीचे उतर आए। पिछले कई दिनों से पुलिस, आईटीबीपी और पीएसी के जवान मौके पर तैनात थे। प्रशासन लगातार वार्ता के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रहा था। मंगलवार को हालात सामान्य होने के बाद सुरक्षा बलों की संख्या भी कम कर दी गई। सुबह लंगर और अरदास का आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सीएम धामी से मिला सिख प्रतिनिधिमंडल
विवाद के बीच मंगलवार सुबह देहरादून में दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों और जांच से जुड़े फैसलों का स्वागत किया। बैठक के दौरान हेमकुंड साहिब यात्रा तथा सिख श्रद्धालुओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
जांच हरिद्वार ट्रांसफर, DIG करेंगे निगरानी
पुलिस मुख्यालय ने कर्णप्रयाग घटना से जुड़ी दोनों एफआईआर की जांच हरिद्वार ट्रांसफर कर दी है। अब इन मामलों की निगरानी हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर करेंगे ताकि निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित की जा सके। इसके अलावा सिख श्रद्धालुओं के साथ कथित दुर्व्यवहार और अदालत में बिना दस्तार पेश किए जाने के आरोपों की जांच डीआईजी स्तर के अधिकारी यशवंत सिंह चौहान को सौंपी गई है। उन्हें दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
16 जून को कर्णप्रयाग बाजार से शुरू हुआ विवाद
विवाद की शुरुआत 16 जून को चमोली जिले के कर्णप्रयाग बाजार में हुई थी। हेमकुंड साहिब यात्रा से लौट रहे निहंग सिखों के जत्थे की एक बाइक बाजार में खड़ी कार से टकरा गई थी। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हुई और मामला हिंसक झड़प में बदल गया। घटना में कई स्थानीय लोग घायल हुए थे। एक होटल कारोबारी की हालत गंभीर होने पर उसे एम्स ऋषिकेश रेफर किया गया। विरोध में स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों ने बद्रीनाथ हाईवे पर करीब पांच घंटे तक चक्काजाम किया था, जिससे लंबा ट्रैफिक जाम लग गया था।
20 जून की शाम नगरासू स्थित गुरुद्वारे में विवाद ने नया मोड़ ले लिया। आरोप लगे कि कुछ निहंगों ने गुरुद्वारे के सेवादार और एक बाबा के साथ मारपीट की तथा एक व्यक्ति को बंधक बना लिया। इसके बाद निहंग पारंपरिक शस्त्रों के साथ गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिलों पर चले गए और खुद को अंदर बंद कर लिया। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने गुरुद्वारे को सुरक्षा घेरे में ले लिया था।
प्रशासन की बातचीत से निकला समाधान
21 जून से प्रशासन, पुलिस और निहंगों के बीच लगातार बातचीत चल रही थी। शुरुआती दौर में निहंगों ने वार्ता से इनकार किया, लेकिन बाद में कई चरणों की बातचीत हुई। 22 जून को बंधकों को मुक्त कर दिया गया और निहंगों ने वीडियो संदेश जारी कर प्रशासन के सहयोग की सराहना की। इसके बाद विवाद धीरे-धीरे शांत होता गया और 24 जून को अंतिम सहमति बनने के बाद निहंग पंजाब लौट गए।
कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए चमोली, कर्णप्रयाग और रुद्रप्रयाग के संवेदनशील क्षेत्रों में बीएनएसएस की धारा 163 लागू की गई है। प्रशासन के अनुसार यह व्यवस्था 27 जून तक प्रभावी रहेगी। अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में स्थिति सामान्य है और हेमकुंड साहिब यात्रा पूरी तरह सुरक्षित एवं सुचारु रूप से संचालित की जा रही है।
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