Rajasthan News: डिजिटल अरेस्ट ठगी नेटवर्क पर CBI का बड़ा अभियान, 16 राज्यों में एक साथ रेडडिजिटल अरेस्ट ठगी नेटवर्क पर CBI का बड़ा अभियान, 16 राज्यों में एक साथ रेड

Rajasthan News: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने गुरुवार को राजस्थान सहित देश के 16 राज्यों में व्यापक स्तर पर छापेमारी कर डिजिटल अरेस्ट ठगी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। जांच एजेंसी ने 80 से अधिक स्थानों पर एक साथ दबिश देकर साइबर अपराध से जुड़े नेटवर्क को निशाने पर लिया। इस अभियान के तहत दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। सीबीआई के अनुसार, यह कार्रवाई डिजिटल अरेस्ट के 200 से अधिक मामलों में सामने आए संगठित नेटवर्क को तोड़ने के लिए की गई। फिलहाल एजेंसी पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है।

ऑपरेशन चक्र-6 के तहत बनीं 60 विशेष टीमें
सीबीआई ने इस कार्रवाई को ऑपरेशन चक्र-6 के तहत अंजाम दिया। इसके लिए 60 विशेष टीमों का गठन किया गया था, जिन्होंने अलग-अलग राज्यों में एक साथ छापेमारी की। जांच एजेंसी का मानना है कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और संगठित तरीके से लोगों को डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर ठगी कर रहा था। अधिकारियों के मुताबिक, विभिन्न राज्यों में चलाए गए अभियान का उद्देश्य केवल आरोपियों को पकड़ना नहीं बल्कि उनके वित्तीय और तकनीकी नेटवर्क को भी ध्वस्त करना था। इसी वजह से छापेमारी के दौरान डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेजों पर विशेष फोकस रखा गया।

शेल कंपनियों और फर्जी खातों से छिपाई जा रही थी रकम
जांच में पता चला है कि आरोपी शेल कंपनियां बनाकर और फर्जी या म्यूल बैंक खातों का उपयोग करके साइबर ठगी से अर्जित धन को इधर-उधर ट्रांसफर कर रहे थे। प्रारंभिक जांच के अनुसार करीब 2 करोड़ रुपए की अवैध कमाई को विभिन्न खातों और माध्यमों के जरिए छिपाने का प्रयास किया गया। सीबीआई का कहना है कि साइबर अपराधियों ने वित्तीय लेन-देन को जटिल बनाकर जांच एजेंसियों से बचने की कोशिश की। अब एजेंसी बैंकिंग ट्रेल और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की आर्थिक गतिविधियों का विश्लेषण कर रही है।

चेन्नई और कोलकाता से दो आरोपी गिरफ्तार
कार्रवाई के दौरान चेन्नई और कोलकाता से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि ये दोनों नेटवर्क के महत्वपूर्ण सदस्य हैं और साइबर ठगी से जुड़े विभिन्न ऑपरेशनों में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। सीबीआई अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर अन्य सहयोगियों और नेटवर्क के संचालन तंत्र की जानकारी जुटा रही है। एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस गिरोह की पहुंच देश के किन-किन हिस्सों और विदेशों तक फैली हुई है।

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट जैसा बनाया गया था फर्जी डोमेन
जांच के दौरान एक ऐसा फर्जी डोमेन सामने आया, जो सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट से काफी मिलता-जुलता था। आरोपियों ने इसी प्लेटफॉर्म का उपयोग कर लोगों को डिजिटल अरेस्ट और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाया और उनसे ठगी की। सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री की शिकायत के बाद सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की थी। तकनीकी जांच और फोरेंसिक विश्लेषण के जरिए एजेंसी ने देश और विदेश में फैले नेटवर्क के कई महत्वपूर्ण लिंक की पहचान की। इसके बाद बड़े स्तर पर छापेमारी की योजना बनाई गई।

फर्जी आदेश बनाकर लोगों को करते थे गुमराह
सीबीआई के अनुसार आरोपी अदालतों और विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों के नाम से फर्जी आदेश, नोटिस और दस्तावेज तैयार करते थे। इन दस्तावेजों को असली बताकर लोगों को डराया जाता था और उनसे धन की मांग की जाती थी। छापेमारी के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज, मोबाइल फोन, डिजिटल उपकरण और बैंक लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड बरामद किए गए हैं। एजेंसी ने इन सभी सामग्रियों को जब्त कर लिया है और उनकी फोरेंसिक जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद नेटवर्क के अन्य सदस्यों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

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