NIILM University Kaithal: (संजय शर्मा) आज के इस दौर में जब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं और नियम तेजी से बदल रहे हैं, तब सिर्फ किताबी कानूनी ज्ञान वकीलों को वैश्विक स्तर पर टिकने की गारंटी नहीं देता। कॉरपोरेट जगत, बैंकिंग और इंटरनेशनल ट्रेड को समझने के लिए कानून के साथ-साथ कॉमर्स और मैनेजमेंट की समझ होना अनिवार्य हो चुका है।
इसी नब्ज को पहचानते हुए कैथल के प्रतिष्ठित एनआईआईएलएम विश्वविद्यालय ने अपने ‘स्कूल ऑफ लॉ’ के तहत कुछ बेहद आधुनिक एकीकृत (इंटीग्रेटेड) पाठ्यक्रमों का खाका खींचा है। देश में वकालत की सर्वोच्च नियामक संस्था, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) की हरी झंडी मिलने के बाद विश्वविद्यालय ने सत्र 2026-27 से इन नए कोर्सेज में दाखिले की खिड़की खोल दी है।
मल्टी-नेशनल कंपनियों और कॉर्पोरेट लॉ में मिलेंगे शानदार पैकेज
इस बार सबसे ज्यादा चर्चा विश्वविद्यालय द्वारा शुरू किए गए BBA LLB (Hons.) और B.Com LLB (Hons.) पाठ्यक्रमों की है। ये पांच वर्षीय प्रोग्राम इस तरह से डिजाइन किए गए हैं जो छात्रों को बहुआयामी (मल्टी-डायमेंशनल) विशेषज्ञता प्रदान करते हैं। शिक्षाविदों की मानें तो इन पाठ्यक्रमों को पूरा करने के बाद युवाओं के लिए केवल जिला अदालतें या न्यायपालिका ही एकमात्र विकल्प नहीं रह जाते।
बल्कि वे कॉर्पोरेट लॉ, इंटरनेशनल टैक्सेशन, मर्चेंट बैंकिंग, लीगल कंसल्टेंसी और बड़ी-बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) के बोर्डरूम में लीगल एडवाइजर के तौर पर सीधे एंट्री पा सकेंगे, जहां पैकेज और करियर ग्रोथ दोनों ही बेहद शानदार हैं।
सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, मूट कोर्ट और इंटर्नशिप से निखरेगी प्रतिभा
विश्वविद्यालय के ‘स्कूल ऑफ लॉ’ ने केवल थ्योरी पर निर्भर रहने के बजाय व्यावहारिक प्रशिक्षण (प्रैक्टिकल लर्निंग) को अपनी यूएसपी बनाया है। इसके लिए कैंपस में ही एक आधुनिक ‘मूट कोर्ट’ (नकली अदालत) की स्थापना की गई है, जहां छात्र असली मुकदमों की तर्ज पर बहस करना और केस ड्राफ्ट करना सीखते हैं।
इसके अलावा यूनिवर्सिटी का ‘लीगल एड क्लिनिक’ ग्रामीण और गरीब तबके को कानूनी सहायता देकर छात्रों को जमीनी हकीकत से रूबरू कराता है। पढ़ाई के दौरान ही देश के नामचीन विधि विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिवक्ताओं के तहत अनिवार्य इंटर्नशिप प्रोग्राम को भी इसका हिस्सा बनाया गया है।
हमारा मकसद सिर्फ डिग्री बांटना नहीं, बल्कि संवेदनशील लीडर्स बनाना: वीसी
इस मील के पत्थर को हासिल करने पर विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर (कुलपति) प्रो. देवेंद्र सिंह ढुल ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा, “एनआईआईएलएम यूनिवर्सिटी का नजरिया सिर्फ क्लासरूम तक सीमित नहीं है। हम केवल डिग्रियां बांटने वाली फैक्ट्री नहीं बनना चाहते।
हमारा उद्देश्य ऐसे कुशल, जागरूक और संवेदनशील विधि विशेषज्ञ तैयार करना है जो भारत के संविधान, सामाजिक न्याय और नैतिक मूल्यों के प्रति पूरी तरह जवाबदेह हों। ये नए ऑनर्स कोर्सेज हमारे बच्चों को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी डंके की चोट पर प्रतिस्पर्धा करने के काबिल बनाएंगे।”
प्रवेश प्रक्रिया शुरू, ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प खुले
विश्वविद्यालय प्रशासन ने साफ किया है कि नए शैक्षणिक सत्र (2026-27) के लिए दाखिले की रेस शुरू हो चुकी है। लॉ के इन तमाम कोर्सेज में सीट बुक करने के लिए छात्र सीधे कैथल स्थित विश्वविद्यालय परिसर में जाकर काउंसिलिंग का हिस्सा बन सकते हैं। इसके अलावा जो छात्र दूर-दराज के इलाकों में रहते हैं, उनके लिए यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करने और डिजिटल मोड से दस्तावेज जमा करने की पूरी व्यवस्था की गई है।

