Haryana News: हरियाणा के मुख्यमंत्री के गृह जिले रहे करनाल में सरकारी धान को ठिकाने लगाने का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिला प्रशासन और खाद्य एवं आपूर्ति विभाग (फूड एंड सप्लाई डिपार्टमेंट) की संयुक्त टीमों ने जब इलाके की राइस मिलों में सरकारी धान के स्टॉक का औचक निरीक्षण किया, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारियों के होश उड़ गए।
रिकॉर्ड के मुताबिक मिल में जितना धान होना चाहिए था, मौके पर उसमें से करीब 1000 टन धान कम पाया गया। गायब किए गए इस सरकारी धान की बाजार में कीमत लगभग ढाई करोड़ रुपये आंकी जा रही है।
मिल मालिक नसीब सिंह चढ़ा पुलिस के हत्थे, महिला साझीदार पर भी शिकंजा
धान के इस बड़े स्टॉक के गायब होने की खबर जैसे ही मुख्यालय पहुंची, प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियों की शिकायत पर पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया। पुलिस ने राइस मिल के मालिक नसीब सिंह को धोखाधड़ी और अमानत में खयानत के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है।
इसके साथ ही मिल में उनकी महिला बिजनेस पार्टनर के खिलाफ भी संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि सरकारी धान को मिलिंग करने के बजाय उसे बाजार में अवैध तरीके से खपाने की तैयारी थी।
अधिकारियों की मिलीभगत का शक, जांच के दायरे में कई सफेदपोश
करनाल की अनाज मंडियों से उठने वाले धान की मिलिंग के नाम पर पहले भी इस तरह के हेरफेर के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन इतनी बड़ी मात्रा में सीधे गोदाम से धान साफ हो जाना विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
जिले के आला अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार मिल मालिक से पूछताछ की जा रही है कि उसने इस धान को कहां और किसे बेचा है। पुलिस इस बात की भी गहराई से तफ्तीश कर रही है कि इस पूरे घोटाले के पीछे विभाग के किन-किन इंस्पेक्टरों या कर्मचारियों का वरदहस्त था। अधिकारियों ने साफ किया है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।

