Dog Loyalty Example: करनाल में वफादारी की मिसाल, मालिक को ब्लैक कोबरा से बचाने के लिए भिड़ गई कुतिया, खुद गंवाई जान
निसिंग में पालतू कुतिया जिम्मी ने सांप से लड़कर बचाई डॉक्टर परिवार की जान
Dog Loyalty Example: हरियाणा के करनाल जिले के निसिंग कस्बे से इंसान और बेजुबान के रिश्ते की एक ऐसी भावुक कर देने वाली कहानी सामने आई है, जिसे सुनकर हर कोई दंग है। कुरुक्षेत्र में आईवीएफ सेंटर चलाने वाले पेशे से डॉक्टर सुमित ठाकर के डेरे पर उनकी वफादार पालतू कुतिया ‘जिम्मी’ ने परिवार को मौत के मुंह से निकाल लिया। रविवार की शाम घर के मुख्य गेट से अंदर घुस रहे एक जहरीले ब्लैक कोबरा के सामने जिम्मी ढाल बनकर खड़ी हो गई। उसने अपनी जान की परवाह न करते हुए सांप पर हमला बोल दिया और तड़प-तड़प कर जान दे दी, लेकिन सांप को घर के भीतर कदम नहीं रखने दिया।
गेट खोलते ही सामने आ गया यमराज, दोनों पालतू कुत्ते भिड़े
मकान मालिक डॉ. सुमित ठाकर ने बताया कि रविवार शाम करीब 6 बजे रोजाना की तरह वह अपने दो पालतू कुत्तों ‘जिम्मी’ और ‘मैक्स’ को टहलाने के लिए बाहर ले जा रहे थे। उन्होंने जैसे ही गेट खोला, सामने साक्षात मौत के रूप में एक विशालकाय ब्लैक कोबरा फन फैलाए खड़ा था। इससे पहले कि डॉ. सुमित कुछ समझ पाते या खुद को संभालते, दोनों वफादार कुत्ते उनके हाथ से चेन छुड़ाकर सीधे सांप की तरफ लपक पड़े। जिम्मी ने सबसे पहले आगे बढ़कर कोबरा पर अपने पंजों और दांतों से हमला कर उसे पीछे धकेलना शुरू कर दिया।
डंक मारने के बाद भी लड़ती रही जिम्मी, सीसीटीवी में कैद हुआ खौफनाक मंजर
इस खूनी लड़ाई के दौरान कोबरा ने जिम्मी के मुंह और पंजे पर कई बार जानलेवा डंक मारे। जहरीले सांप के लगातार काटने के बाद भी जिम्मी एक इंच पीछे नहीं हटी और लगातार मुकाबला करती रही। वहीं उसका साथी कुत्ता मैक्स लगातार सांप के इर्द-गिर्द घूमकर उसे घर के अंदर जाने से रोकता रहा। इस पूरी बहादुरी का एक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें साफ दिख रहा है कि कैसे जिम्मी ने अपनी जान दांव पर लगाकर सांप को रोके रखा। करीब 8 मिनट तक चली इस लड़ाई के बाद सांप पस्त होकर पास की एक दीवार की ओट में छिप गया, लेकिन तब तक कोबरा का घातक जहर जिम्मी के पूरे शरीर में फैल चुका था।
डॉक्टर के पहुंचने से पहले तोड़ा दम, स्नेकमैन ने काबू किया सांप
डॉ. सुमित ने आनन-फानन में सांप को काबू करने के लिए स्नेकमैन और जिम्मी के इलाज के लिए पशु चिकित्सक (वेटनरी डॉक्टर) को फोन किया। मौके पर पहुंचे स्नेकमैन ने काफी मशक्कत के बाद कोबरा को दबोच लिया और उसे सुरक्षित दूर जंगलों में छोड़ दिया। लेकिन अफसोस, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टर के पहुंचने से पहले ही जिम्मी का शरीर जहर के कारण पूरी तरह नीला पड़ चुका था और उसने मालिक की गोद में ही आखिरी सांस ली।
9 साल से परिवार का हिस्सा थी जिम्मी, बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल
डॉ. सुमित ठाकर ने बेहद भावुक होते हुए बताया कि वह जिम्मी को 9 साल पहले करनाल से छोटे पिल्ले के रूप में घर लाए थे। वह उनके लिए महज एक जानवर नहीं, बल्कि परिवार की सबसे लाडली सदस्य थी। गर्मियों में उसके लिए एसी-कूलर और सर्दियों में हीटर तक का इंतजाम रहता था। घर के तीनों बच्चों का जिम्मी से बेहद खास लगाव था, जिसके जाने के बाद से बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे निसिंग इलाके में आज जिम्मी की इस बहादुरी और सच्ची वफादारी की चर्चा है, जिसने खुद मौत को गले लगाकर अपने इंसानी परिवार को जीवनदान दे दिया।
