Anemia Elimination Ladwa: एनीमिया के खिलाफ एसडीएम अनुभव मेहता का बड़ा एक्शन प्लान, सवा लाख की आबादी की होगी जांच
एनीमिया के खिलाफ एसडीएम अनुभव मेहता का बड़ा एक्शन प्लान
Anemia Elimination Ladwa (कैलाश गोयल): समाज के शारीरिक और मानसिक विकास में सबसे बड़ी बाधा बनकर उभर रही एनीमिया (खून की कमी) की बीमारी को जड़ से उखाड़ने के लिए लाडवा प्रशासन ने कमर कस ली है। ‘एनीमिया एलिमिनेशन माह’ के विशेष अवसर पर स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में विभिन्न सरकारी विभागों की एक अहम समीक्षा बैठक बुलाई गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए उपमंडल अधिकारी (नागरिक) एवं एसडीएम अनुभव मेहता ने दो टूक शब्दों में कहा कि एनीमिया महज एक बीमारी नहीं बल्कि एक गंभीर सामाजिक और जनस्वास्थ्य की चुनौती है। इसे किसी एक विभाग के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता; इसके प्रभावी नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला एवं बाल विकास विभाग को एक टीम की तरह आपसी तालमेल के साथ काम करना होगा।
सवा लाख की आबादी पर नजर; नवजातों से लेकर धात्री माताओं की होगी सघन जांच
वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी (SMO) डॉ. कृष्णकांत के संचालन और मार्गदर्शन में आयोजित इस बैठक में ब्लॉक स्तर पर तैयार की गई माइक्रो-प्लानिंग को साझा किया गया। इस योजना के तहत लाडवा क्षेत्र की कुल 1,15,044 की आबादी को कवर किया जाएगा। अभियान के मुख्य फोकस में 6 माह से 59 माह तक के नौनिहाल, 5 से 9 वर्ष तक के स्कूली बच्चे, 10 से 19 वर्ष के किशोर-किशोरी और विशेष रूप से 15 से 49 वर्ष की महिलाएं, गर्भवती माताएं तथा धात्री (स्तनपान कराने वाली) महिलाएं शामिल हैं। इन सभी संवेदनशील वर्गों के स्वास्थ्य की नियमित जांच के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी टीमें घर-घर और स्कूलों में दस्तक देंगी।
गंभीर मरीजों को मिलेगा विशेषज्ञ इलाज; जिला समन्वयकों ने दी तकनीकी जानकारी
कार्यक्रम में विशेष रूप से पहुंचे एनीमिया एलिमिनेशन कार्यक्रम के जिला समन्वयक विनय गांधी ने उपस्थित ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, सीडीपीओ और अन्य कर्मचारियों को इस उन्मूलन कार्यक्रम की तकनीकी बारीकियों और डेटा प्रबंधन से अवगत कराया। बैठक में निर्णय लिया गया कि जांच के दौरान जो भी व्यक्ति एनीमिया से ग्रसित पाया जाएगा, उसकी तुरंत पहचान कर ऑन-द-स्पॉट दवाइयां और पोषण चार्ट उपलब्ध कराया जाएगा। एसडीएम अनुभव मेहता ने निर्देश दिए कि यदि कोई मरीज अत्यधिक गंभीर श्रेणी (सिवियर एनीमिया) का मिलता है, तो उसे स्थानीय स्तर पर उलझाने के बजाय तुरंत जिला स्तरीय विशेषज्ञ स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया जाए ताकि समय रहते उसकी जान बचाई जा सके।
मातृ-शिशु स्वास्थ्य में सुधार ही मुख्य लक्ष्य: डॉ. कृष्णकांत
बैठक के अंत में वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. कृष्णकांत ने सभी विभागों के प्रतिनिधियों का आभार जताते हुए कहा कि इस पूरे अभियान का अंतिम ध्येय मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना और एक तंदुरुस्त समाज की नींव रखना है। समय रहते पहचान होने से इस बीमारी को बहुत ही कम खर्च और सही खान-पान से ठीक किया जा सकता है। प्रशासन ने क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक संस्थाओं से भी अपील की है कि वे गांवों और वार्डों में इस अभियान को लेकर जागरूकता फैलाएं ताकि कोई भी जरूरतमंद इस स्वास्थ्य लाभ से वंचित न रह सके।
