June 30, 2026

Narnaul News: नारनौल DDPO प्रमोद देशवाल तत्काल प्रभाव से सस्पेंड, स्वास्थ्य मंत्री आरती राव की बैठक में लेट आने की मिली सजा

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Narnaul News: नारनौल DDPO प्रमोद देशवाल तत्काल प्रभाव से सस्पेंड, स्वास्थ्य मंत्री आरती राव की बैठक में लेट आने की मिली सजा

मंत्री आरती राव के सामने टालमटोल करना पड़ा भारी

Narnaul News: हरियाणा के प्रशासनिक गलियारे से इस वक्त की एक बड़ी खबर सामने आ रही है। सरकार ने कार्यप्रणाली में ढिलाई और अनुशासनहीनता के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए नारनौल के जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी (DDPO) प्रमोद देशवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। प्रमोद देशवाल के पास डीडीपीओ के साथ-साथ जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (DCEO) का भी अतिरिक्त जिम्मा था। हरियाणा के राज्यपाल के नाम से जारी इस निलंबन आदेश के बाद उन्हें चरखी दादरी उपायुक्त (डीसी) कार्यालय में अटैच कर दिया गया है।

बैठक में मंत्री जी बैठी रहीं और अधिकारी 15 मिनट लेट पहुंचे; नहीं दे पाए कोई सही जवाब

इस कड़े प्रशासनिक एक्शन की पटकथा बीते 9 जून को ही लिखी जा चुकी थी। दरअसल, प्रदेश की स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने नारनौल के पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में जिला स्तरीय विकास कार्यों और पंचायत संबंधी योजनाओं की समीक्षा के लिए सुबह ठीक 9:00 बजे अधिकारियों की एक हाई-लेवल मीटिंग बुलाई थी। मंत्री समय पर पहुंच गईं और बैठक की शुरुआत में ही जैसे ही पंचायतों के काम का लेखा-जोखा मांगा गया, तो पता चला कि संबंधित विभाग के मुखिया प्रमोद देशवाल गायब हैं।

बैठक शुरू होने के करीब 15 मिनट बाद जब अफसर साहब पहुंचे, तो स्वास्थ्य मंत्री ने उनसे देरी से आने का कारण पूछा। सूत्रों के मुताबिक, देशवाल कोई ठोस या तार्किक जवाब देने के बजाय टालमटोल करते नजर आए। अधिकारी के इस रवैये और वर्क मैनेजमेंट को लेकर मंत्री आरती राव ने गहरी आपत्ति जताई। मंत्री ने उनके व्यवहार को अनुशासनहीनता मानते हुए मौके पर मौजूद जिला उपायुक्त (DC) को तुरंत उन्हें सस्पेंड करने की सिफारिश फाइल आगे बढ़ाने के निर्देश दे दिए थे।

आदेश की कॉपी सामने आई, पर सस्पेंशन की वजहों पर विभाग ने साधी चुप्पी

इस मामले में हरियाणा सरकार के विकास एवं पंचायत विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयेंद्र देशवाल की ओर से बकायदा आदेश जारी कर दिया गया है। हालांकि यह पत्र 26 जून को ही साइन हो गया था, लेकिन प्रशासनिक गलियारों में यह आज ही सार्वजनिक हुआ है। सरकारी चिट्ठी में नियमानुसार यह तो स्पष्ट किया गया है कि निलंबन के पहले 6 महीनों के दौरान उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा और वे चरखी दादरी डीसी की अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे, लेकिन इसमें निलंबन के असल कारणों का कोई आधिकारिक उल्लेख नहीं किया गया है।

घंटी बजती रही, व्हाट्सएप पर आया जवाब— ‘मुझे कुछ नहीं कहना’

इस पूरे घटनाक्रम पर जब निलंबित अधिकारी प्रमोद देशवाल का पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उनका रुख भी टालने वाला ही रहा। मीडिया संवाददाताओं द्वारा उन्हें फोन मिलाया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। बाद में जब व्हाट्सएप के जरिए उनसे लिखित प्रतिक्रिया मांगी गई, तो उन्होंने बेहद संक्षिप्त और कड़े लहजे में केवल इतना ही जवाब दिया— “मैं इस मामले में किसी भी प्रकार का कोई जवाब नहीं देना चाहता।” बहरहाल, मंत्री की सख्ती और इस निलंबन ने जिला स्तर पर तैनात अन्य अधिकारियों को भी समयबद्धता और अनुशासन बनाए रखने का एक कड़ा संदेश दे दिया है।

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