राम मंदिर दान विवाद: 5 जुलाई को चंपत राय के खिलाफ संतों की बड़ी बैठक
अयोध्या में चंपत राय के खिलाफ बढ़ा विरोध, संत और वकील कार्रवाई की मांग पर अड़े
अयोध्या में राम मंदिर के दान और चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितता मामले ने नया मोड़ ले लिया है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के खिलाफ अब वकीलों के बाद संत समाज भी खुलकर सामने आ गया है। 5 जुलाई को संतों की बैठक बुलाई गई है, जिसमें आगे की रणनीति पर फैसला होगा।
राम मंदिर के दान और चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितता मामले को लेकर अयोध्या में विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय खुद को आरोपों से निर्दोष बता चुके हैं, लेकिन अब उनके खिलाफ संत समाज और वकीलों का दबाव बढ़ता दिख रहा है। 5 जुलाई को अयोध्या में प्रतिष्ठित संतों की बैठक बुलाई गई है, जिसमें चंपत राय और ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर चर्चा की जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने अयोध्या के धार्मिक और कानूनी दोनों क्षेत्रों में हलचल बढ़ा दी है। संतों का कहना है कि राम मंदिर के दान और चढ़ावे से जुड़े कथित मामलों ने श्रद्धालुओं की भावनाओं को प्रभावित किया है, इसलिए पूरे मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए।
5 जुलाई की बैठक में क्या होगा?
अयोध्या के कई प्रतिष्ठित संतों ने संयुक्त बैठक बुलाने का फैसला किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर सामूहिक संकल्प लिया जाएगा।
संत समाज के इस फैसले को मामले में बढ़ते असंतोष के रूप में देखा जा रहा है। बैठक के बाद आगे की रणनीति भी तय की जा सकती है।
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वकील भी सड़कों पर उतरे, जांच की मांग
संतों के साथ-साथ अयोध्या के वकील भी इस मुद्दे पर सक्रिय हो गए हैं। वकीलों ने प्रदर्शन करते हुए मांग की है कि चंपत राय को भी जांच में शामिल किया जाए और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
वकीलों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जा सके। हालांकि, जांच एजेंसियों की ओर से इस मांग पर कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।
बार एसोसिएशन पहले ही ले चुका है बड़ा फैसला
इससे पहले अयोध्या बार एसोसिएशन ने प्रस्ताव पारित कर निर्णय लिया था कि उसका कोई भी सदस्य राम मंदिर चंदा चोरी मामले के आरोपियों की ओर से पैरवी नहीं करेगा। संगठन ने यह प्रस्ताव 29 जून को पारित किया था।
एसोसिएशन ने यह भी चेतावनी दी थी कि यदि कोई सदस्य इस फैसले का उल्लंघन करता है तो उस पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही संगठन ने चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा था कि तीनों तीन दिन के भीतर अयोध्या छोड़ दें। ये तीनों ट्रस्ट से जुड़े बताए जाते हैं, लेकिन स्रोत के अनुसार उनका नाम प्राथमिकी में शामिल नहीं है।
क्या जांच की कोई आधिकारिक स्थिति सामने आई है?
अभी तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, संतों और वकीलों की ओर से जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की जा रही है। अंतिम निर्णय संबंधित जांच एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा। फिलहाल आरोपों की सत्यता पर कोई अंतिम आधिकारिक निष्कर्ष घोषित नहीं किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राम मंदिर के दान और चढ़ावे से जुड़े कथित चोरी और अनियमितता के आरोपों को लेकर विवाद जारी है। इसी मामले में संत समाज और वकील अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
वहीं, चंपत राय सार्वजनिक रूप से अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार कर चुके हैं और स्वयं को निर्दोष बता चुके हैं। मामले में जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
